मॉ माटी मानुष और बलात्कार

कोलकाता | समाचार डेस्क: पश्चिम बंगाल की मॉ-माटी-मानुष के सरकार की मुखिया ममता बैनर्जी दुष्कर्म के मामलों में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी नजर नहीं आ रही है.पश्चिम बंगाल का पार्क स्ट्रीट, कामदुनी, मध्यमग्राम भले ही एक दूसरे से अलग हो, लेकिन एक घृणित चीज इन्हें एकदूसरे से जोड़ती है. ये सभी स्थान दुष्कर्म जैसी घटनाओं के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार द्वारा अनुचित रूप से संभाले जाने से चर्चा में हैं.

पश्चिम बंगाल में महिलाओं पर हो रहें अत्याचारों की सूची लंबी है. वर्ष 2012 की शुरुआत में एंग्लो-इडियन महिला के साथ एक चलती कार में दुष्कर्म किया गया था. जिसका पीड़िता अभी भी न्याय का इंतजार कर रही है. ममता ने भी इसे उनकी सरकार को बदनाम किए जाने की कोशिश कह विवाद पैदा कर दिया था. जब एक पुलिस अधिकारी दमयंती सेन ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था, तो उनका तबादला कहीं और कर दिया गया. मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है.

इसी तरह उत्तर 24 परगना जिले के बारासात के नजदीक स्थित मनोरम दृश्य वाले कामदुनी में स्नातक की द्वितीय वर्ष की छात्रा का अपहरण कुछ युवाओं ने 7 जून 2012 को किया था. इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. यह घटना उस वक्त हुई जब वह बारासात से परीक्षा दे कर घर लौट रही थी. घटना के बाद ममता ने गांव का दौरा किया, लेकिन एक प्रदर्शन के दौरान वे अपना आपा खो बैठीं और प्रदर्शनकारियों को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का एजेंट बता उन पर बरस पड़ीं. लड़की के पिता अभी भी आरोपियों को सजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

हाल ही में क्रूर घटना उत्तर 24 परगना जिला के मध्यमग्राम में हुई. यहां एक टैक्सी चालक की नाबालिग बेटी के साथ अक्टूबर 2012 को सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. इस घटना ने वीभत्स रूप तब ले लिया जब पुलिस में मामला दर्ज करा कर लौटने के दौरान उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया गया.

लगातार मिल रही धमकी के बीच पीड़िता का परिवार नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के नजदीक रहने लगा. परन्तु यहां भी पड़ोसियों के ताने सुनने को मिलने लगे और 23 दिसंबर को लड़की 65 फीसदी जली हुई अवस्था में अपने घर मिली और 31 दिसंबर को एक सरकार अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया.

पुलिस लगातार कह रही है कि उसने आत्मदाह किया है लेकिन लड़की के पिता ने राज्यपाल से मुलाकात में बताया कि उसे दो लड़कों ने जला कर मार डाला. इसके बाद पुलिस ने अपना बयान बदला और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया.

यह सवाल बना हुआ है कि लड़की की मौत पर पुलिस चुप क्यों रही, राजनीतिक गलियारों में खबर है कि पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मिल रहे आदेश के अनुसार काम कर रही है, जो नए साल के अवसर पर प्रदर्शन से बचना चाहती थी.

इस बात से परेशान परिवार के सदस्यों ने वामपंथी कार्यकर्ताओं से हाथ मिलाया और एक जनवरी के बाद अंतिम संस्कार करने का फैसला किया. हालांकि, पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और शव को अंतिम संस्कार के लिए शवदाह गृह ले गई.

लड़की के पिता को पुलिस थाने में धमकी दी गई. उन्होंने कहा,”पहले मुझे मनाया गया, तब धमकी दी गई कि अगर मैंने मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं दिए और अंतिम संस्कार जल्द नहीं किया गया, तो मुझे बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे.”

हालांकि, जब लड़की का पिता दृढ़ रहा तब पुलिस ने उन्हें घर जाने दिया, जहां उन्हें भयावह रात बितानी पड़ी. उनका यह आरोप है कि स्थानीय तृणमूल कांग्रेस सदस्यों ने उनके घर को घेर लिया और पथराव किया और शव को पुलिस के हवाले कर बिहार चले जाने की मांग की.

एक जनवरी को पुलिस शव को ले गई और इसका अंतिम संस्कार करने की कोशिश की, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर ऐसा नहीं कर पाई.

अंतत: लड़की के परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया और उसका शव पहले माकपा के श्रमिक संघ सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स के कार्यालय में रखा गया था.

इधर, वामपंथी राज्य में हाल के सभी चुनाव में हार का सामना कर रही है और इस मुद्दे पर कब्जा कर रही है लेकिन एक शव पर उनकी राजनीति की शहरी विकास मंत्री फिरहद हाकिम और राज्य के मुख्य सचिव संजय मित्रा आलोचना कर रहे हैं.

लड़की के परिवार को अब सुरक्षा की चिंता है. सरकार को लिखे पत्र में पिता ने अपने कटु अनुभव को साझा किया है और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है और गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की सजा की मांग की है. राज्यपाल ने उन्हें हालांकि, आश्वासन दिया है.

इस बीच, पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग और पश्चिम बंगाल महिला आयोग का कहना है कि उन्होंने मामला राज्य सरकार के सामने उठाया है उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है.

गौर करने वाली बात यह है कि मॉ माटी मानुष का नारा देकर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर सवार तृणमूल कांग्रेस की मुख्यमंत्री के पास बलात्कार से पीड़ितो से मिलने के लिये न तो समय है और न ही उनकी सरकार इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रही है. वरन् कई मौकों पर तो उन्होंने बलात्कारियों को परोक्ष रूप से मदद ही दी है.

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