मोदी के भाषण में भविष्य की झलक होगी

न्यूयार्क | समाचार डेस्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा में मोदी के भाषण में भविष्य की झलक होगी. गौरतलब है कि भारतीय समयानुसार शनिवार की रात 8 बजे भारत के प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे. पूरी दुनिया उनके भाषण को इसलिये सुनना चाहेगी कि उनके संबोधन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ के ‘राग कश्मीर’ का जवाब होगा. इस बात की उम्मीद राजनयिक कर रहें हैं कि प्रधानमंत्री मोदी, नवाज़ शरीफ़ के दिये हुए ‘एजेंडे’ के बजाये अपने पूर्व निर्धारित एजेंडे पर ही चलेंगे. इसी के बीच में कश्मीर के संबंध में उनका भारत सरकार की नीतियों का खुलासा होगा. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी का भाषण हिन्दी में होगा. उनसे पहले तत्कालीन जनता पार्टी से विदेश मंत्री रहें अटल बिहारी बाजपेई ने भी 1977 में हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था.

ऐसा पहली बार हो रहा है कि भारत में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की पृष्ठभूमि वाला प्रधानमंत्री संपूर्ण बहुमत से आसीन हुआ है. गौरतलब है कि संघ की कश्मीर नीति, कांग्रेस से जुदा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाक प्रधानमंत्री द्वारा इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराये जाने की मांग करने पर भारत के नये प्रधानमंत्री मोदी क्या रुख अख्तियार करते हैं इसे जानने की उत्सुकता पूरी दुनिया के राजनीतिज्ञों तथा राजनयिकों में है. ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में भविष्य की झलक होगी.


भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए जाने वाले भाषण में मुख्य जोर ‘भविष्य की ओर देखने’ पर होगा. भारत ने इस बीच महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कश्मीर पर बयान का आधिकारिक तौर पर खंडन किया है. नवाज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की आवश्यकता जताई. यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी इसका जवाब देंगे, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि मोदी के भाषण में ‘आगे की ओर देखने’ पर जोर होगा.

इस बीच, पाकिस्तान के बयान का खंडन करने के लिए भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के पहले सचिव अभिषेक सिंह ने जवाब के अधिकार के तहत कहा, “मैं इस सदन को यह बताना चाहूंगा कि जम्मू एवं कश्मीर के लोगों ने दुनियाभर में स्वीकृत लोकतांत्रिक सिद्धांतों व व्यवहार के अनुरूप अपना भविष्य चुना है और वे आगे भी ऐसा करते रहेंगे. इसलिए हम पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारी के बयान का खंडन करते हैं.”

नवाज ने महासभा में अपने संबोधिन के दौरान जम्मू एवं कश्मीर को ‘मुख्य मुद्दा’ करार देते हुए कहा कि इसका समाधान किया जाना चाहिए और राज्य में जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए. उन्होंने भारत पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द करने का भी आरोप लगाया.

अकबरुद्दीन ने यह भी कहा कि यहां मोदी और शरीफ के बीच कोई वार्ता नहीं होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से मुलाकात होगी. गौरतलब है कि दिल्ली स्थित पाक उच्चायुक्त द्वारा कश्मीर के अलगाववादी तत्वों से मुलाकात करने के कारण भारत ने पाकिस्तान के साथ प्रस्तावित सचिव स्तरीय वार्ता को रद्द कर दिया था. जाहिर सी बात बात है कि प्रधानमंत्री मोदी पाक प्रधानमंत्री नवाज़ को ज्यादा तव्वजों नहीं देने की रणनीति पर चल रहें हैं.

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