आप का 18 सियासी दांव

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: आप के नेता केजरीवाल ने उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात के बाद अपने राजनीतिक पत्ते खोल दिये है. एक तरफ आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के उप राज्यपाल से 10 दिनों की मोहलत मांगी है दूसरी तरफ बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा करने वाले कांग्रेस तथा भाजपा को पत्र लिखकर उनका रवैयै स्पष्ट करने को कहा है. केजरीवाल ने उप राज्यपाल के आवास के बाहर मीडियाकर्मियों को बताया, “हमने इस मसले पर फैसले के लिए 10 दिन की मोहलत मांगी है.”

अभी तक यह माना जा रहा था कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाना नही चाहती है परन्तु शनिवार को उप राज्यपाल नजीब जंग से मिलने के बाद उसने नई सियासी चाल चली है. यदि भाजपा तथा कांग्रेस उसके द्वारा उठाये गये 18 मुद्दो पर अपनी राय अभी से सार्वजनिक रूप से प्रकट कर दे तो आप सरकार बनाने को तैयार है. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बाबत पत्र लिखा है. केजरीवाल ने भाजपा और कांग्रेस का उल्लेख करते हुए कहा, “हमने आपका समर्थन नहीं मागा. उनकी क्या मंशा है.”

गौर तलब है कि दिल्ली विधानसभा में भाजपा गठबंधन को 32, आप को 28 तथा कांग्रेस को 8 सीटें मिली हैं. दिल्ली के उप राज्यपाल ने सबसे पहले सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिये निमंत्रण दिया था. जिसे भाजपा ने विनम्रता से मना कर दिया था. हैरत की बात है कि किसी को समर्थन न देने तथा किसी से समर्थन न लेने की घोषणा करने वाली आप ऐसा सियासी चाल चलेगी किसी ने नहीं सोचा था. आम आदमी पार्टी भाजपा तथा कांग्रेस से 18 मुद्दों पर स्पष्ट राय देने के लिये कह रही है ताकि बाद के उलझनो से बचा जा सके.

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दोनों पार्टियों के अध्यक्षों को पत्र के माध्यम से पूछा है कि दिल्ली में वीआईपी कल्चर खत्म करने, जन लोकपाल बिल लाने, दिल्ली में स्वराज स्थापित करने तथा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिये जाने के बाबत उनके क्या विचार हैं. आप के संयोजक केजरीवाल ने आगे पूछा है कि दिल्ली के बिजली कंपनियों के आडिट करवाने, तेज चलने वाले बिजली के मीटरो को बदलने, पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था करने के लिये तथा अनाधिकृत कालोनियों में रहने वाले दिल्ली के 30 फीसदी जनता को राहत पहुचाने के लिये क्या आप तैयार हैं.

पत्र के माध्यम से आप ने सवाल उठाया है कि दिल्ली के झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिये क्या भाजपा तथा कांग्रेस उसे समर्थन देगी. आप चाहती है कि नियमित कामों में ठेकेदारी प्रथा बंद हो तथा ठेकेदार के तहत कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाये. इसके अलावा आप ने उद्योगपतियों तथा व्यापारियों के लिये ईमानदार व्यवस्था कायम करने पर भी दोनों पार्टियों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिये कहा है. आप ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ है.

आम आदमी पार्टी किसानों को वह सभी सुविधाएं तथा सब्सिडी देना चाहती है जो अन्य राज्यों के किसानों को उपलब्ध है. आप चाहती है कि दिल्ली के निजी स्कूलों के फीस को नियंत्रित किया जाये तथा सरकारी स्कूलों का स्तर बढ़ाया जाये. दिल्ली में नये सरकारी अस्पताल खोले जायें, महिलाओं की सुरक्षा के लिये विशेष सुरक्षा दल का गठन किया जाये. आप चाहती है कि दिल्ली में इतने नये अदालत खोलें जाये तथा जजो की नियुक्ति की जाये कि कोई भी मामला 6 माह से 1 साल के भीतर ही निपट जाये.

अंत में भाजपा से इस बात के लिये पूछा गया है कि चूंकि दिल्ली नगर निगम में उसका राज है इसलिये जब किसी कार्यक्रम के क्रियांनवयन के लिये उसके सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी तो क्या वह मिल पायेगी. वहीं कांग्रेस से 18वां प्रश्न पूछा गया है कि क्या केन्द्र सरकार उन्हें कार्यक्रम क्रियांवयन में सहयोग देगी.

भाजपा तथा कांग्रेस को लिखे केजरीवाल के पत्र से स्पष्ट है कि आप दोनों पार्टियों से अपने घोषणा पत्र पर सार्वजनिक समर्थन चाहती है. इसे राजनीतिक हल्कों में अरविंद केजरीवाल के पहले सियासी दांव के रूप में देखा जा रहा है. कांग्रस तथा भाजपा की प्रतिक्रिया आने के बाद ही पता चल पायेगा कि क्या केजरीवाल दिल्ली में फूलप्रूफ सरकार बनाने जा रहें हैं या नहीं.

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