आरक्षित 27488 सरकारी पद रिक्त

नई दिल्ली | एजेंसी: एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित 27,488 सरकारी पद रिक्त चल रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि शीर्ष सरकारी पदों पर हालांकि एसटी का बेहतर प्रतिनिधित्व है.

एनजीओ ने कहा कि सबसे अधिक भेदभाव शिक्षा क्षेत्र में है. आठ मई 2013 को रिक्त पदों में से 12,195 अनुसूचित जनजाति के लिए, 8,332 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए और 6,961 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.

‘देश का अधूरा समावेशी कार्यक्रम : सरकारी सेवाओं और पदों में जनजातियों को आरक्षण नहीं दिए जाने पर एक अध्ययन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय इन वर्गो के साथ सबसे अधिक भेद-भाव कर रहे हैं.

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मिली सूचना के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 2006-07 में कुल मंजूर 1,187 पदों के विरुद्ध सिर्फ 46 एसटी प्रोफेसर थे. जबकि 2010-11 में 1,667 पदों की जगह यह संख्या घटकर सिर्फ चार रह गई.

इसी तरह केंद्रीय विश्विद्यालयों में 2010-11 में 10 एसटी रीडर बहाल थे, जबकि कुल पदों की संख्या 3,155 थी. 2006-07 में कुल 1,744 पदों में से सिर्फ 18 रीडर थे.

एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स के निदेशक सुहास चकमा ने कहा, “यूजीसी से मिली सूचना के मुताबिक उच्च शिक्षा संस्थानों में सबसे अधिक जातीय भेद-भाव है, शायद यह आरक्षण नीति के विरोध के कारण है.”

उल्लेखनीय है कि देश की आबादी 121 करोड़ है जिसमें से अनुसूचित जनजातीय वर्ग की आबादी 84 करोड़ है.

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