दिल्ली: आम आदमी धरने पर

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: अरविंद केजरीवाल सोमवार को केन्द्रीय गृहमंत्रालय के सामने धरना देंगे. दिल्ली के इतिहास में पहली बार दिल्ली सरकार के मंत्री केन्द्र सरकार के किसी मंत्रालय के सामने मांगएं मनवाने के लिये धरना देंगे. दिल्ली के पॉच पुलिस
वालों को निलंबित करने की मांग पर आम आदमी पार्टी के मंत्री धरना देने जा रहें हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है तथा दिल्ली की पुलिस केन्द्रीय गृहमंत्रालय के अधीन है. धरना 10 से शुरु होगा जिसके मद्देनजर क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई है.


सोमनाथ भारती तथा राखी बिड़ला के साथ हुए पुलिस के विवाद के
बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल तथा गृहमंत्री से पक्षपात करने वाले पॉच पुलिस वालों को निलंबित करने की मांग की थी. आम आदमी पार्टी के संयोजक संजय सिंह ने कहा है कि यदि सोमवार की सुबह तक निलंबन की कीर्यवाही न की गई तो आप के मंत्री धरने पर बैठ जायेंगे.

बीते दिनों जब दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने कथित सैक्स रैकेट तथा नशे का व्यापार करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस के कार्यवाही करने को कहा था उनकी दिल्ली पुलिस के अफसरों के साथ झड़प हो गई थी. जिसके बाद सोमनाथ भारती ने स्वयं ही
जनता के साथ मिलकर छापा मारा था.

वहीं राखी बिड़ला ने एक महिला को उसके ससुराल पक्ष द्वारा जला देनें के आरोप पर कार्यवाही की मांग की थी जिसे नहीं माना गया था. राखी बिड़ला ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस पक्षपात कर रही है.

बाद के घटनाक्रम में कथित तौर पर सैक्स रैकेट चलाने वाली अफ्रीकी महिलाओं ने सोमनाथ भारती के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी. दिल्ली की एक अदालत नें सोमनाथ भारती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.

इस घटना से दिल्ली की सरकार तथा केन्द्रीय गृहमंत्रालय के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. किसने सोचा था कि कांग्रेस के समर्थन पर टिकी अरविंद केजरीवाल की सरकार उसी के मंत्रालय के सामने धरना देंगे.

वहीं दूसरी तरफ रविवार को भाजपा नेता अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में कहा है, “यह स्वाभाविक है कि सचिवालय से ज्यादा आप सड़कों पर धरना देने में ज्यादा सहज होती है. पिछले तीन सप्ताह से सचिवायलय का दृश्य यही उभरा है कि पार्टी आत्मघाती रास्ते पर चल रही है.”

जेटली ने लिखा है, “संगठन में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं है. पार्टी में विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता, निजी विचारक और खुद को सही मानने वालों की भरमार है. एक आंदोलन चलाने और पार्टी गठित करने व सरकार चलाने में जमीन आसमान का अंतर होता है.”

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