भ्रष्टाचार भेदी अर्जुन नहीं है ‘आप’

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: अब लोगों को यह महसूस होने लगा है कि ‘आप’ कोई अर्जुन नहीं है जो हर एक लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखता हो.

सोमवार को एक खबरिया चैनल ने दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर का स्टिंग आपरेशन किया था.
दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी मीटर लगाने के लिये तथा मीटर की रीडिंग कम दिखाने के लिये घूस लेते पाये गये. वहीं उनके अफसरों ने तो हद कर दी जब उन्होंने रिपोर्टर पर सवाल दागा कि घूस की रसीद ले ली है या नहीं.


इस खबर के चलने के बाद 3 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. इसी के साथ 800 कर्मचारियों का तबादला भी कर दिया गया है.

गौरतलब है कि अमरीका के एक राजनीति विज्ञानी का कहना है कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था से भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने का आम आदमी पार्टी का लक्ष्य हासिल हो पाना कठिन है. भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कड़े कानूनों की जरूरत होती है और केवल एक सरकार बना लेने से भ्रष्टाचार खत्म होने की संभावना नहीं है.

वर्जीनिया विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर जॉन इकेवेरी-गेंट ने सोमवार शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में “अर्थव्यवस्था, व्यापार और भारत के 2014 के चुनाव” विषय पर अपने विचार प्रकट किए.

श्रोताओं के समक्ष प्रोफेसर ने कहा कि सभी का यही सवाल है कि क्या आप का झाड़ू देश से भ्रष्टाचार का अंत कर देगा? लेकिन केवल एक सरकार बना लेने से आप भ्रष्टाचार का अंत नहीं कर सकती है.

उन्होंने कहा कि भले ही आप ने दिल्ली विधानसभा में जीत हासिल कर सरकार बना ली है, लेकिन आम चुनाव में उनके प्रदर्शन पर सबकी निगाह रहेगी. निजी तौर पर मेरा मानना है कि वे 50 से अधिक सीटें नहीं जीत सकते हैं. इकेवेरी-गेंट को भारत की खंडित राजनीति का विशेषज्ञ माना जाता है.

लुटियन की दिल्ली ने आम आदमी पार्टी को उसके गर्भकाल से देखा है. इस पार्टी का जन्म सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन से हुआ है. अब हालात यह है कि जो लोग कभी रामलीला मैदान से भारतीय संसद को ललकारा करते थे वे अब मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं.

अब उन पर जिम्मेदारी आन पड़ी है कि भ्रष्टाचार का गाना गाना छोड़कर उसे मिटाये. अराजक तौर पर आंदोलन चलाना संसदीय व्यवस्था को ललकारना और बात है तथा सत्ता हासिल करके उसी मांग को जमीनी हकीकत में तब्दील करना और बात है. अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री बन जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि दिल्ली से भ्रष्टाचार मिट जायेगा.

भ्रष्टाचार मिटाने के लिये इसके मूल कारण को समझना पड़ेगा. भ्रष्टाचार नीचे से ऊपर नहीं, ऊपर से नीचे आया है. भ्रष्टाचार को पहले ऊपर से विदा करना पड़ेगा. उसके बाद ही नीचे के कर्मचारियों को घूस लेने से रोका जा सकता है. दिल्ली की जनता यदि यह सोचती है कि केवल वोट देकर उसका काम खत्म हो गया है तो यह गलत होगा. उसे याद रखना होगा कि भ्रष्टाचार इस व्यवस्था की देन है जिसे मिटाये बगैर भ्रष्टाचार को मिटाना असंभव है.

आम आदमी पार्टी तथा अरविंद केजरीवाल कोई अर्जुन नहीं है जो हर एक लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखता होखास करके भ्रष्टाचार को. झाड़ू से गंदगी को तो साफ किया जा सकता है लेकिन पूरे समाज को बदलने के लिये इस झाड़ू में और रूपान्तरण की जरूरत है. शायद कोई द्रोण्राचार्य मिल जाये जो आम आदमी पार्टी को हर एक लक्ष्य भेदने की कला सीखा सके.

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