‘आप’ में क्यों खिंची तलवारें?

नई दिल्ली | अमर उजाला: तस्वीर की जुबान नहीं होती. भविष्य और वर्तमान भी नहीं होता. तस्वीरों का अतीत होता है. उस अतीत में ही तस्वीर अपने होने का किस्‍सा समेटे होती हैं. योंगेंद्र यादव का हाथ थामे अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर उन दिनों से पहले की है, जिन दिनों एकेडेमिक और चुनाव विश्लेषण की दुनिया जानेमाने चेहरे योगेंद्र यादव को यूजीसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. आरोप था की यूजीसी में रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का ‘स्कोप’ नहीं है. बात सितंबर, 2013 की है.

उस दिन से आज तक योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी के लिए एक ही वाक्य इस्तेमाल करते रहे-हमारी पार्टी. शुक्रवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अतिचर्चित बैठक के बाद योगेंद्र यादव ने कहा, ‘जिन पार्टीयों को हम इस देश की घटिया पार्टी कहते आए हैं, उनसे भी ज्यादा घटिया हरकत आज हुई.’ ‘हमारी पार्टी’ अब योगेंद्र यादव की पार्टी नहीं रह गई थी.

शनिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समर्थकों ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार और अजीत झा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. योगेंद्र यादव के मुताबिक, बैठक में मारपीट हुई, सदस्यों को बाउंसरों ने घसीट कर बाहर किया और अरविंद केजरीवाल ये सब देखते रहे.

क्यों और कैसे हुआ ये? योगेंद्र और अरविंद की छवि जय और वीरू और जैसी थी. एक आप का मस्‍तिष्क था और दूसरा चेहरा. फिर दोनों के बीच क्यों खिंची तलवारें?

आम आदमी पार्टी की आंतरिक कलह 26 फरवरी को पहली बार सतह पर आई ‌थी. ‌दिल्‍ली विधानसभा चुनावों के बाद 26 फरवरी को पहली बार आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. उस बैठक में केजरीवाल सम‌र्थक सदस्यों ने योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के खिलाफ कई सवाल उठाए थे.

खबरें यह भी आई कि प्रशांत भूषण ने उस बैठक में अरविंद केजरीवाल को संयोजक पद से हटाने की मांग की. उनका तर्क था कि एक ही व्य‌क्ति मुख्यमंत्री और पार्टी का संयोजक नहीं हो सकता. केजरीवाल ने संयोजक पद से इस्तीफा देने का प्रस्ताव भी दिया. हालांकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में केजरीवाल का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया. बाद में प्रशांत भूषण ने कहा कि केजरीवाल को संयोजक पद से हटाना कभी मुद्दा ही नहीं रहा.

हालांकि 26 फरवरी की शाम को कार्यकारिणी में मतदान का अधिकार रखने वाले 26 सदस्यों ने केजरीवाल से उनके घर पर मुलाकात की. उस मुलाकात में ही राजन‌ीतिक मामलों की समिति के पुनर्गठन का फैसला किया गया और उन सदस्यों ने उसकी जिम्‍मेदारी अरविंद केजरीवाल को दी.

26 फरवरी की बैठक में कुछ खबरों और ऑडियो रिकॉर्डिंग से यह साबित करने की कोशिश की गई कि हरियाणा में चुनाव न लड़ने के फैसले से नाराज योगेंद्र ने केजरीवाल के खिलाफ खबरें प्रकाशित करवाई थीं.

बाद में एक पत्रकार और अरविंद केजरीवाल के एक सहयोगी के बीच हुई बातचीत को मीडिया में लीक किया गया.

उस बातचीत में अरविंद केजरीवाल के सहयोगी विभव कुमार ने उस समय दि हिंदू की रिपोर्टर रहीं चंदर सुता डोगरा की से बातचीत की थी, जिसमें डोगरा ने बताया था कि योगेंद्र ने उन्हें नास्ते पर बुलाया और आप के बारे में जानकारियां दी. हालांक‌ि योगेंद्र यादव ने दावा किया कि उन्होंने चार पत्रकारों को नास्ते पर बुलाया था और सामान्य बातचीत हुई थी. उसमें छापे जाने योग्य कुछ नहीं था.

उस बैठक में पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल एल रामदास का पत्र भी रखा गया, हालांकि उस पर चर्चा नहीं हुई. उस पत्र में रामदास पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और अरविंद केजरीवाल की कार्य शैली पर सवाल खड़े किए थे.

आप की राजनीतिक मामलों की सम‌िति के पुनर्गठन के लिए चार मार्च को बैठक हुई. उस बैठक में योंगेद्र यादव और प्रशांत भूषण को राजन‌ीतिक मामलों की समि‌ति से बाहर कर दिया गया. अरविंद केजरीवाल उस बैठक के अगले दिन ही इलाज कराने के लिए बंगलुरू रवाना हो गया.

बाद के तकीबन 10 दिन बहुत ही हंगामे भरे रहे. योगेंद्र और प्रशांत ने केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर उन मुद्दों को गिनाया, जिसके चलते केजरीवाल खेमें और उनके बीच ठनी हुई थी.

11 मार्च को हुई उस प्रेस कांफ्रेंस में योगेंद्र और प्रशांत ने अरविंद केजरीवाल पर कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने का आरोप लगाया था. उसी शाम उस आरोप की पु‌ष्टि करता एक ऑडियो सामने आ गया, जिसमें केजरीवाल आप के एक पूर्व विधायक राजेश गर्ग को कांग्रेस के विधायकों से संपर्क करने को कह रहे थे. वीडियो पिछले साल अगस्त महीने का था.

उस ऑडियो के बाद ये लगभग तय हो गया ‌था कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निकाल दिया जाएगा. हालांकि उन्हें निकालने या पार्टी में बने रहने का फैसला राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में होना था.

बैठक के लिए पिछले कई दिन से लॉबिंग हो रही थी. शुक्रवार को योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के खेमें में आनंद कुमार और अजीत झा का नाम भी जुड़ गया. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर केजरीवाल और उनके खेमें पर कई आरोप लगाए. शुक्रवार को ही अरविंद केजरीवाल का एक और ऑडियो टेप सामने आया, जिसमें वह आनंद कुमार, योगेंद्र यादव और प्रशांत को गालियां देते सुनाई दिए.

उस टेप के सामने आने के बाद ये तय हो गया था कि अरविंद केजरीवाल का खेमा योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार और अजीत झा को बिलकुल बर्दास्त करने के मूड में नहीं है और हुआ भी ऐसा ही.

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