अजीत जोगी फिर मैदान में

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी महासमुंद से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. माना जा रहा है कि जोगी का राजनीतिक संन्यास टूट सकता है, जिसकी घोषणा उन्होंने कुछ महीने पहले ही की थी.

दिल्ली से लौटने के बाद अजीत जोगी ने साफ कहा है कि पार्टी की आलाकमान सोनिया गांधी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिये कहा है. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्य की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो गई है, ऐसे में केवल महासमुंद ही ऐसी सीट है, जिस पर नाम की घोषणा होनी है और इस सीट पर अजीत जोगी का नाम घोषित होगा.

यह दिलचस्प है कि हमेशा की तरह कांग्रेस के स्थानीय नेता जोगी को किनारे करने की अघोषित नीति पर काम करते रहते हैं और अजीत जोगी हर बार और आक्रमकता के साथ उभर कर सामने आते रहे हैं. इस बार अगर जोगी को टिकट मिलती है तो यह जोगी विरोधियों के बड़ी पटखनी होगी.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद संसदीय सीट से विद्याचरण शुक्ला को हराकर संसद में पहुँचे अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं. 21 अप्रैल 1946 को छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में जन्मे अजीत जोगी की आरंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई. शुरु से ही मेधावी छात्र रहे अजीत जोगी ने भोपाल से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और फिर बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली.

पहले वे रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में व्याख्याता हुए और फिर यहीं से उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी और आईपीएस के लिए चुने गए. डेढ़ साल आईपीएस रहने के बाद उन्होंने फिर परीक्षा दी और आईएएस बन गए.

तत्कालीन मध्यप्रदेश के इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रायपुर, सीधी और शहडोल जैसे महत्वपूर्ण शहरों में लगातार 14 सालो तक ज़िलाधीश रहने के बाद 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की निकटता के चलते वे कांग्रेस की टिकट पर मध्यप्रदेश से ही राज्यसभा के सदस्य चुने गए. राज्यसभा में दूसरा कार्यकाल पूरा करते-करते उन्हें कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता की ज़िम्मेदारी मिल गई.

इसके बाद उन्होंने 1998 में अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और विजयी होकर 12 वीं लोकसभा के सदस्य हुए लेकिन 1999 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वर्ष 2000 में जब मध्यप्रदेश का विभाजन कर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया तो वे पहले मुख्यमंत्री नियुक्त हुए.

2003 में हुए राज्य विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने इसी साल हुए लोकसभा के चुनाव में छत्तीसगढ़ के महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से भाजपा में शामिल हो गए विद्याचरण शुक्ला के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा. चुनाव प्रचार के दौरान वे एक घातक सड़क दुर्घटना के शिकार हुए और इसके कारण उन्हें पक्षाघात हुआ और कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. वे चुनाव तो जीत गए लेकिन इसके बाद से उन्हें व्हील चेयर पर ही रहने को मजबूर होना पड़ा.

इस बीच उनके इकलौते बेटे अमित जोगी को रायपुर में एनसीपी के एक नेता रामावतार जग्गी की हत्या में शामिल होने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ़्तार कर लिया बाद में अमित जोगी इस मामले में बाहर आये और राजनीतिक तौर पर सक्रिय हुये. ताज़ा विधानसभा में अमित जोगी मरवाही से विधायक चुने गये हैं. अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी दूसरी बार कोटा से विधायक बनी हैं.

सोनिया गाँधी के बेहद नज़दीकी रहे अजीत जोगी अक्सर विवादों में रहे हैं. कभी अपने जाति प्रमाणपत्र को लेकर तो कभी छत्तीसगढ़ में भाजपा को तोड़ने के लिए विधायकों के ख़रीद फ़रोख़्त के मामले में. इसी विवाद के चलते सोनिया गाँधी से उनकी दूरी भी हुई और कांग्रेस से थोड़े समय वे बाहर भी रहे.

हाल के दिनों में भी विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से अलग सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता ने पार्टी की नींद उड़ा दी थी. बाद में जब अमित जोगी और रेणु जोगी को पार्टी ने टिकट दी, तब कहीं जा कर मामला सुलझा. ताज़ा विधानसभा चुनाव के बाद जब उनके धुर विरोधी भूपेश बघेल को राज्य में पार्टी की कमान सौंप दी गई तो उन्होंने एक साल तक राजनीति से अलग रहने और भजन किर्तन करने की घोषणा कर दी. अब एक बार फिर जोगी का नाम चर्चा में है और जोगी चुनाव मैदान में उतरने को तैयार.

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