माल्या को सरकारी मदद का आरोप

 

मुंबई | समाचार डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय ने विजय माल्या को 18 मार्च को उपस्थित होने के लिये समन भेजा है. प्रवर्तन निदेशालय ने कर्ज नहीं चुकाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या को शुक्रवार 18 मार्च को उसके समक्ष उपस्थिति होने के लिए समन भेजा. वहीं उनके देश से बाहर जाने के मामले पर संसद में जोरदार बहस पैदा हो गई, जबकि माल्या का कहना है कि वह भागे नहीं हैं. माल्या के विदेश जाने के मुद्दे पर राज्यसभा में शुक्रवार को दूसरे दिन भी भारी शोरशराबा हुआ.

ED का समन
ईडी ने गत सोमवार को कालेधन की हेराफेरी का एक मामला दर्ज किया और उसके एक दिन बाद किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों तथा आईडीबीआई बैंक को समन भेजा था. आईडीबीआई का कंपनी पर 900 करोड़ रुपये बकाया है.


शुक्रवार सुबह ईडी ने किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी ए. रघुनाथन से कंपनी के विभिन्न लेन-देन मामलों पर पूछताछ की.

रघुनाथन और कंपनी के अन्य पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा ईडी ने आईडीबीआई बैंक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक योगेश अग्रवाल को भी समन भेजा है, जिनसे बैंक द्वारा कंपनी को दिए गए ऋण तथा अन्य मामलों में पूछताछ की जाएगी.

माल्या का स्पष्टीकरण
राज्यसभा के सदस्य माल्या अभी विदेश में हैं और अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह एजेंसी के सामने हाजिर होने के लिए कब तक वापस आएंगे.

माल्या ने ट्विटर पर लिखा, “मैं अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी हूं. मैं हमेशा भारत से बाहर आता-जाता रहता हूं. न तो मैं देश से भागा हूं और न ही भगोड़ा हूं. यह आरोप बकवास है.”

माल्या ने कहा कि उनका भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है. उन्होंने साथ ही कहा कि वह भारत के कानून का सम्मान करते हैं और उसका पालन करेंगे.

माल्या ने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि मीडिया उनके मामले की सुनवाई करे.

उन्होंने कहा, “एक बार मीडिया किसी पर भी दोष मढ़ने पर उतारू हो जाती है, तो सच्चाई और तथ्य जल कर राख हो जाते हैं.”

माल्या ने कहा, “मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा हैं कि मुझे अपनी संपत्ति की घोषणा करनी चाहिए. क्या इसका मतलब यह है कि बैंक को पता नहीं है कि मेरे पास कितना धन है और क्या वे संसद में मेरे द्वारा की गई संपत्ति घोषणा को नहीं देख सकते?”

क्या है मामला
भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 17 बैंकों का कंसोर्टियम 9,000 करोड़ रुपये की देनदारी नहीं चुकाने के मामले में माल्या की गिरफ्तारी चाहता है.

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को माल्या को एक नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है और इससे संबंधित मामले में अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की है.

आरोप- माल्या को भागने में मदद
इस बीच राज्यसभा में माल्या संबंधी मुद्दे पर भारी शोर-शराबा हुआ और कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने माल्या को भागने में मदद की है.

सदन में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा, “16 अक्टूबर 2015 को सीबीआई ने आव्रजन अधिकारियों को कहा था कि यदि माल्या देश से बाहर जाना चाहें, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए. सीबीआई ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था. ठीक एक महीने बाद सीबीआई ने अपना आदेश बदल दिया और अधिकारियों को इसकी सूचना देने के लिए कही.”

उन्होंने पूछा, “एक महीने में क्या हो गया? सरकार ने उनके भागने में भूमिका निभाई है.”

इसके जवाब में सरकार ने कहा कि वे माल्या को उस तरह से भागने नहीं देंगे, जैसे बोफोर्स घोटाला के आरोपी क्वोत्रोच्चि को भागने दिया गया था.

संसद से बाहर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, राजीव गौड़ा और रणजीत रंजन ने यहां एक बयान में कहा, “उपलब्ध तथ्यों से अब पता चलता है कि वास्तव में विजय माल्या को गुप्त तरीके से देश से बाहर जाने में मदद की गई, ताकि वह बैंकों के कंसोर्टियम के 9,000 करोड़ रुपये बकाए का भुगतान करने से बच जाएं.”

उन्होंने कहा, “यदि सरकार ने माल्या से कोई गुप्त समझौता किया है या वह पिछले दरवाजे से इस मुद्दे को निपटा रही है, तो सच्चाई सबके सामने लाने की जिम्मेदारी उसकी है.”

देर से जागी बैंक
महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने बुधवार को बेंकों की पैरवी करते हुए सर्वोच्च न्यायालय को केंद्रीय जांच ब्यूरो के हवाले से बताया था कि माल्या दो मार्च को देश छोड़ चुका है.

माल्या के देश छोड़ने के छह दिनों बाद बैंकों के कंसोर्टियम ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर उसे ‘देश से बाहर जाने से रोकने’ की मांग की थी.

इस बीच बंबई उच्च न्यायालय ने माल्या से बकाया वसूली के लिए महाराष्ट्र सेवाकर विभाग की एक याचिका पर 28 मार्च को सुनवाई निर्धारित कर दी है.

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