अमरीका ने की गडकरी की जासूसी?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: यदि गडकरी के घर से खुफिया उपकरण मिला हैं तो कौन उनकी जासूसी करवा रहा था. खबरों के अनुसार नितिन गडकरी के 13 तीन मूर्ति लेन वाले सरकारी आवास के बेडरूम में उच्च शक्ति वाला सुनने का उपकरण पाया गया. इस मामले में कांग्रेस, एनसीपी और वाम दलों की जांच की मांग को गृहमंत्रालय ने इनकार कर दिया है. गृहराज्यमंत्री किरेन रिजिजु ने कहा कि गडकरी ने स्वंय इसे अटकल बताया हैं तो हम इसमें दखल कैसे दे सकते हैं.

गौरतलब है कि इस प्रकार के खुफिया यंत्र का उपयोग पश्चिमी देश करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं अमरीका तो नितिन गडकरी की जासूसी नहीं करवा रहा था ?


कुछ समय पहले अमरीकी पूर्व खुफिया ठेकेदार स्नोडेन ने खुलासा किया था कि अमरीकी सरकार ने भारत के भारतीय जनता पार्टी की खुफियागिरी करने का आदेश अपनी एजेंसी को दिया था. इसका खुलासा अमरीकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के द्वारा किया गया था. वाशिंगटन पोस्ट में छपी खबर के अनुसार अमरीका ने विश्व के छह राजनीतिक दलों की जासूसी करने की 2010 में एनएसए को अनुमति दी थी.

दस्तावेज में कहा गया था कि न्यायालय ने ‘एस’ फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलांस एक्ट के तहत एनएसए को 193 विदेशी सरकारों की भी जासूसी करने की अनुमति दी थी. यह खुलासा जुलाई माह का है.

वैसे भी पिछले करीब एक साल से ऐसा संकेत मिल रहा था कि भारत की जनता सत्ता परिवर्चन कर सकती है तथा भाजपा के सत्ता में आने के पूरे आसार है. नितिन गडकरी भाजपा के पूर्व में अध्यक्ष रहें हैं तथा संघ के भी काफी करीबी तथा विश्वसनीय माने जाते हैं. ऐसे हालात में पूरी संभावना है कि अमरीका, नितिन गडकरी के घर में इस प्रकार के खुफिया यंत्र किसी तरह से प्लांट करने में सफल हो गया हो.

हालांकि, नितिन गडकरी ने रविवार को उन मीडिया रपटों का खंडन किया, जिसमें कहा गया है कि यहां उनके आवास में एक खुफिया श्रवण उपकरण पाया गया था. गडकरी ने ट्वीट किया, “मीडिया के एक वर्ग में आई वे खबरें पूरी तरह अटकलबाजी हैं, जिनमें कहा गया है कि मेरे नई दिल्ली स्थित आवास में सुनने वाला उपकरण पाया गया है.”

इस खबर के वायरल होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी के यहा इफ्तार की पार्टी में कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि यह मामला सच न हो, लेकिन सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरकार को संसद में बयान देना चाहिए.

वहीं, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने गडकरी के बयान के उलट इस मामले को अलग ही मोड़ दे दिया. उन्होंने इसे अक्टूबर की घटना बताकर यूपीए सरकार को घेरने की कोशिश की. जबकि डीएमके ने इसे किसी ‘घरवाले’ का काम बताया है तथा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री से सफाई मांगी है.

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी आशंका व्यक्त की है कि मेरी खुद की जांच और मेरे सूत्रों ने खुलासा किया है कि मामला पिछले साल अक्तूबर के बाद नहीं हो सकता है. उपकरण को वहां लगाना और उसका मतलब हुआ कि यह ऐसे समय में हुआ जब संप्रग सत्ता में थी. एनएसए ने खासतौर पर भाजपा को निशाना बनाया और गडकरी एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे. उन्हें आरएसएस का विश्वास प्राप्त था.

इसे तर्को के आधार पर भी समझा जा सकता है. गडकरी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रहें हैं ऐसे में भाजपा के अंदरखाने के कई रणनीति को पार्टी के बजाये उनके घर में भी बैठकर तय किया जाता होगा. खबरों के अनुसार संघ के विश्वास प्रप्त होने के कारण उनके घर में संघ के लोगों का आना-जाना बना रहता था. ऐसे में भाजपा की खुफिया गिरी करवाने के लिये नितिन गडकरी सबसे मुनासिब व्यक्ति, अमरीकी खुफिया कलाकारों के लिये हो सकते हैं.

बहरहाल, मुद्दा संसद में उठा है तथा इसकी जांच करवाई जायेगी जिससे साफ हो जायेगा कि यदि गडकरी के घर में कोई खुफिया यंत्र पाया गया है तो उसे किसने लगवाया था. गौरतलब है कि सितंबर माह में भारत के प्रधानमंत्री मोदी की अमरीका की बहु प्रतीक्षित यात्रा तय है ऐसे में राजनयिक कारणों से भी भारतीय पक्ष इसे अभी उठाना नहीं चाहेगा.

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