आध्यात्मिक विजय के लिए निकले हैं

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: विहिप के अशोक सिंघल ने कहा है घर वापसी हर बिछुड़े का अधिकार है. जिससे, उसे रोका नहीं जा सकता. दूसरी तरफ देश में धर्मांतरण को लेकर बहस छिड़ी हुई है. धर्मातरण को लेकर भले ही राज्यसभा में हंगामे के कारण कार्यवाही नहीं चल पा रही हो और भारतीय जनता पार्टी इस प्रकरण से अपना पल्ला झाड़ रही हो, लेकिन विश्व हिंदू परिषद, विहिप धर्मातरण को आध्यात्मिक विजय मानती है. विहिप के संरक्षक अशोक सिंहल ने यहां रविवार को कहा, “हम तो लोगों का दिल जितने व आध्यात्मिक विजय के लिए निकले हैं, घर वापसी करना प्रत्येक बिछुड़े हुए का अधिकार है, जिसे कोई रोक नहीं सकता.” सिंहल ने अपने संगठन की स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर ‘विश्व हिंदू परिषद-एक परिचय’ पुस्तक का विमोचन किया और अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा, “हमने कभी किसी का धर्मातरण नहीं किया, हम तो लोगों का दिल जितने व आध्यात्मिक विजय के लिए निकले हैं, घर वापसी करना प्रत्येक बिछुड़े हुए का अधिकार है जिसे कोई रोक नहीं सकता.”


पुस्तक के लेखक व विहिप, दिल्ली के सह-संगठन मंत्री डॉ. अनिल कुमार ने पुस्तक की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि गत 50 वर्षो में विहिप द्वारा किए गए कार्यो तथा आगामी योजनाओं के संदर्भ में संक्षिप्त, किंतु सारगर्भित विवरण देने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है.

विहिप की विज्ञप्ति के अनुसार, प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का प्रक्कथन विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने लिखा है. विमोचन के अवसर पर राय ने कहा कि धर्मातरण रोकने के लिए एक कठोर कानून बनाना नितांत आवश्यक है, जिसकी मांग विहिप विगत 50 वर्षो से कर रही है.

चम्पत राय की यह बात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई अन्य हिंदूवादी नेताओं से मेल खाती है. इनके बयानों से स्पष्ट है कि अगर कानून बने और भविष्य में बहुसंख्यक हिंदुओं का कभी कोई कौम धर्मातरण न करा पाए तो इतने से भी ये संतोष कर लेंगे.

दक्षिणी दिल्ली स्थित विहिप मुख्यालय में हुए इस कार्यक्रम में त्रिनिदाद से आए स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद, होलैंड के राजा लुइस, प्रांत संघचालक कुलभूषण आहूजा, विहिप के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंहल तथा प्रांत अध्यक्ष डॉ. रिखब चंद जैन सहित राजधानी के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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