आडवाणी, जोशी को नोटिस

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी और मुरली मनोहर को नोटिस जारी किया. न्यायालय ने उन्हें यह नोटिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है, जिसमें 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में दोनों नेताओं को आपराधिक षड्यंत्र के आरोप से मुक्त कर दिया गया था. सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूति एच.एल. दत्तू और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने आडवाणी और जोशी के अतिरिक्त केंद्रीय मंत्री उमा भारती, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को भी नोटिस जारी किया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22 साल पुराने इस मामले में 20 मई, 2010 को इन्हें षड्यंत्र के आरोपों से मुक्त कर दिया था.

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि हाजी महबूब अहमद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए इसके खिलाफ नई याचिका दायर की है, जिसके बाद न्यायालय ने नोटिस जारी किए.


न्यायालय ने आडवाणी तथा अन्य को आपराधिक षड्यंत्र से आरोपमुक्त करने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो को अपने पक्ष में दस्तावेज जुटाने के लिए चार सप्ताह का समय दिया.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन.के. कौल ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि सीबीआई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने में हुई देरी को लेकर पहले ही हलफनामा दायर कर चुकी है.

न्यायालय ने सीबीआई को चार सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह कानून, याचिका दायर करने में हुई देरी और उसकी विशेषता के आधार पर सुनवाई करेगा.

सीबीआई ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला आने के लगभग नौ माह बाद 18 फरवरी, 2011 को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि उसे न्यायालय को अभी इस बात के लिए भी आश्वस्त करना है कि उसने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने में नौ माह की देरी क्यों की?

सीबीआई ने अपनी अपील में कहा था कि आडवाणी के अतिरिक्त अन्य लोगों को आपराधिक षड्यंत्र से आरोपमुक्त कर दिए जाने का फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 फरवरी, 2001 के फैसले के विपरीत है.

इस मामले में आडवाणी, जोशी, कल्याण, उमा के अतिरिक्त विनय कटियार, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, हरी डालमिया, साध्वी ऋतंभरा, महंता अवैद्यनाथ को भी आरोपी बनाया गया है.

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