बदायूं दुष्कर्म षड़यंत्र है?

लखनऊ | समाचार डेस्क: उत्तरप्रदेश के बदायूं जनपद में सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. मामले की जांच कर रही सीबीआई के मुताबिक वारदात के सभी पांचों नामजद आरोपी पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट में पास हो गए हैं और उनके पूर्व के बयानों में कोई अन्तर नहीं पाया गया है.

इसके बाद से इस मामले को लेकर फिर नई बहस छिड़ गई है कि आखिर इस सनसनीखेज मामले की पूरी हकीकत और रहस्य क्या है.

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई को केंद्रीय फोरेंसिंक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिल गई है. जिसमें पांचों आरोपियों के फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक आकलन, फोरेंसिक बयान विश्लेषण व पॉलीग्राफ टेस्ट लिए थे. इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई का कहना है कि पांचों आरोपियों पप्पू, अवधेश, उर्वेश यादव, कांस्टेबल छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव के बयान में कोई अंतर नहीं पाया गया है.

आरोपियों ने दुष्कर्म, हत्या और सबूतों को नष्ट के करने के आरोपों से स्पष्ट इनकार किया है. इन पांचों आरोपियों को बीते जून में सीबीआई ने मामला दर्ज करने के बाद हिरासत में लिया था. गौरतलब है कि पॉलीग्राफ एक प्रकार का सत्य परीक्षण होता है. इसका प्रयोग आपराधिक मामलों की जांच हेतु किया जाता है.

गौरतलब है कि बदायूं के उसैत थाना क्षेत्र के कटरा गांव में दो किशोरियों से सामूहिक दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या करके शवों को पेड़ से लटका दिया गया था. ये दोनों किशोरियां शौच जाने के लिए घर से निकलीं थी और इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया था, जबकि बाद में इनका शव पेड़ से लटका मिला था.

सीबीआई के जांच ने बदायूं दुष्कर्म मामले में रहस्य को और गहरा दिया है. यदि गिरफ्तार आरोपी सच बोल रहें हैं तो युवतियों के साथ दुष्कर्म कर किसने उनकी हत्या की थी. अब जब सभी आरोपियों के खिलाफ पॉलीग्राफ टेस्ट में कोई सूबत नहीं पाए गए हैं और सभी के बयानों में कोई फर्क नहीं मिला, उससे अभी तक की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में खड़ी होती नजर आ रही है.

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