वैद्यनाथ मंदिर के पंचशूल में छिपा रहस्य

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ से हर साल हजारों श्रद्धालू वैद्यनाथ धाम जाते हैं लेकिन इसके बावजूद भी बहुत ही कम लोगों को बैजनाथ धाम के महत्व के बारे में पता है. झारखंड के देवघर जिला स्थित वैद्यनाथ धाम का विशाल शिव मंदिर सभी द्वादश ज्योर्तिपीठों से भिन्न है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके शीर्ष पर त्रिशूल नहीं, ‘पंचशूल’ है, जिसे सुरक्षा कवच माना गया है. यह भगवान शिव का है पंचशूल, सिर्फ रावण ही जानता था इसे भेदने की कला.

पंचशूल के विषय में धर्म के जानकारों का अलग-अलग मत है. मान्यता है कि यह त्रेता युग में रावण की लंका के बाहर सुरक्षा कवच के रूप में स्थापित था. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, भगवान विष्णु ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था. उन्होंने एक ग्वाले का भेष धारण कर रावण को यहां रोका, जो कैलाश से शिवलिंग को उठाकर लंका ले जा रहा था.

धर्माचार्यो का कहना है कि शिवपुराण में ज्योतिर्लिग की पूजा का महत्व बताया गया है. कहा गया है कि कोई अगर छह महीने तक लगातार शिव ज्योतिर्लिग की पूजा करता है, तो उसे पुनर्जन्म का कष्ट नहीं उठाना पड़ता.

मंदिर के तीर्थ पुरोहित दुर्लभ मिश्रा बताते हैं कि धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि रावण को पंचशूल यानी सुरक्षा कवच को भेदना आता था, जबकि यह भगवान राम के वश में भी नहीं था. विभीषण ने जब युक्ति बताई, तभी राम और उनकी सेना लंका में प्रवेश कर सकी थी.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवच के कारण ही इस मंदिर पर आज तक किसी भी प्राकृतिक आपदा का असर नहीं हुआ है.

पंडितों का कहना है कि पंचशूल का दूसरा कार्य मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईष्र्या का नाश करना है. मगर पंडित राधा मोहन मिश्र ने इस पंचशूल को पंचतत्वों-क्षिति, जल, पावक, गगन तथा समीर से बने मानव शरीर का द्योतक बताया.

मंदिर के पंडों के मुताबिक, मुख्य मंदिर में स्वर्ण कलश के ऊपर लगे पंचशूल सहित यहां के सभी 22 मंदिरों पर लगे पंचशूलों को वर्ष में एक बार शिवरात्रि के दिन नीचे उतार लिया जाता है तथा सभी को एक निश्चित स्थान पर रखकर विशेष पूजा कर फिर से वहीं स्थापित कर दिया जाता है.

इस दौरान शिव और पार्वती के मंदिरों के गठबंधन को भी हटा दिया जाता है. लाल कपड़े के दो टुकड़ों में दी गई गांठ खोल दी जाती है और महाशिवरात्रि के दिन फिर से नया गठबंधन किया जाता है. गठबंधन वाले पुराने लाल कपड़े के दो टुकड़ों को पाने के लिए हजारों भक्त यहां एकत्रित होते हैं.

ज्ञात हो कि पंचशूल को मंदिर से नीचे लाने और फिर ऊपर स्थापित करने का अधिकार एक ही परिवार को प्राप्त है.

वैद्यनाथ धाम मंदिर के प्रांगण में वैसे तो विभिन्न देवी-देवताओं के 22 मंदिर हैं, परंतु बीच में स्थित शिव का भव्य और विशाल मंदिर कब और किसने बनाया, यह शोध का विषय माना जाता है.

मध्य प्रांगण में 72 फीट ऊंचे शिव मंदिर के अलावा अन्य 22 मंदिर स्थापित हैं. इसी प्रांगण में एक घंटा, एक चंद्रकूप और प्रवेश के लिए विशाल सिंह दरवाजा बना हुआ है.

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