बालको प्रबंधन बनाम ‘मेक इन इंडिया’

कोरबा | संवाददाता: पूर्व केन्द्रीय मंत्री चरणदास महंत ने आरोप लगाया है कि बालको प्रबंधन का रवैया ‘मेक इन इंडिया’ के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि बाल्को प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से दो विद्युत संयंत्रो का निर्माण किया है. जिसमें से एक 540 मेगावाट का व दूसरा 1200 मेगावाट का है. इन दोनों विद्युत संयंत्रो की स्थापना बालको एल्युमिनियम संयंत्र को विद्युत देने के लिये की गई है. अब बालको प्रबंधन उसी एल्युमिनियम संयंत्र के रोलिंग मिल को बंद करने की अनुमति चाह रहा है.

चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि बालकों का 51 फीसदी शेयर सरकार खरीद ले. चरणदास महंत ने कहा कि जब साल 2001 में तत्कालीन एनडीए सरकार के समय बालको को स्टरलाइट को बेचा जा रहा था उस समय भी कांग्रेस ने उसका विरोध किया था. डॉ. महंत ने याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 51 प्रतिशत शेयर खरीदने का प्रस्ताव भी राज्य सरकार की तरफ से दिया था. उन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में डॉ. रमन सिंह सरकार संयंत्र को संचालित करें.


मुख्यमंत्री रमन सिंह को लिखे पत्र में डॉ. महंत ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार बालको के 51 फीसदी शेयर खरीदकर इसका संचालन अपने हाथ में ले. डॉ. महंत ने कहा कि वर्तमान बालको प्रबंधन इसके रोलिंग मिल को बंद करके करीब 1000 लोगों का रोजगार छीनना चाहती है. जिससे कोरबा औद्योगिक क्षेत्र की शांति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

उल्लेखनीय है कि एक चलते हुये ब्लांट को बंद कर उत्पादन रोक देना ‘मेक इन इंडिया’ के विपरीत है. बालको का गठन 1965 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के तौर पर किया गया था और इसकी उत्पादन क्षमता 300,000 टन सालाना है. हालांकि 2001 में केंद्र सरकार ने कंपनी में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी वेदांत रिसोर्सेज की सहायक इकाई स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को बेच दी. शेष 49 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार के पास है.

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