आरबीआई नियमों के अधीन हों एनबीएफसी: सुब्बाराव

नई दिल्ली | एजेंसी: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी. सुब्बाराव का मानना है कि बैंकिंग और गैर-बैंकिंग कंपनियों (एनबीएफसी) को आरबीआई के एक ही नियम के अधीन होना चाहिए, ताकि 2008 जैसा गंभीर संकट पैदा नहीं हो.

मंगलवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन द्वारा यहां आयोजित एक सालाना बैंकिंग सम्मेलन में सुब्बाराव ने कहा कि बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बीच मजबूत आपसी संबंध है और ऐसे में एक ही नियामक का एक ही नियम वित्तीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है.


गवर्नर का बयान इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि सरकार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को आरबीआई के नियंत्रण से लेकर एक एकीकृत वित्तीय प्राधिकरण के अधीन करना चाहती है. सुब्बाराव ने कहा कि वित्त मंत्रालय के इस तरह के कदम से वित्तीय अस्थिरता पैदा हो सकती है.

उन्होंने कहा, “मौद्रिक नीति प्रभावी हो, उसके लिए जरूरी है कि ऋण निर्माण (बैंकों और एनबीएफसी जैसे ऋण देने वाले संस्थानों द्वारा) का नियमन आरबीआई करे.”

सुब्बाराव ने 2008 के वित्तीय संकट का हवाला देते हुए कहा कि संकट का प्रमुख कारण ‘ऋण मध्यस्थता गतिविधियां’ थीं, जिसका संचालन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां कर रही थीं और जो नियामक के दायरे से बाहर थी.

सुब्बाराव का कार्यकाल चार सितंबर को समाप्त हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि देश का एक भी बैंक अंतर्राष्ट्रीय बड़े बैंकों में शामिल नहीं है और यह देश चुनिंदा अधिग्रहण के जरिए एक भारतीय अंतर्राष्ट्रीय बैंक का सृजन करना चाहता है.

उन्होंने कहा, “हमारा सबसे बड़ा बैंक बड़े बैंकों की अंतर्राष्ट्रीय सूची में 60वें स्थान पर है. और यदि वह कारोबार बढ़ाकर वैश्विक आकार हासिल करना चाहे, तो इसमें वर्षो लग सकता है.”

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