भारतीय बैंकों के ये बड़े कर्जदार…

रायपुर | विशेष संवाददाता: भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ रुपयों के आसामी विजय माल्या के शोर-शराबे में दूसरे बड़े कर्जदारों के नामों पर चुप्पी क्यों? ऐसा नहीं है कि भारतीय बैंकों से व्यापार करने के नाम पर केवल विजय माल्या ने ही कर्ज ले रखा था. आपकों जानकर हैरानी होगी कि इससे भी ज्यादा की रकम अनिल अंबानी, अनिल अग्रवाल तथा गौतम अडानी ने ले रखी है. जाहिर है कि भारतीय बैंक अब तक इनकी वसूली करने में नाकाम रहें हैं या उन्होंने यह पुनीत कार्य अब तक प्रारंभ नहीं किया है.

विदेशी ब्रोकरेज कंपनी ‘क्रेडिट सुइस’ के अऩुसार देश के पांच बड़े उद्योगपतियों ने भारतीय बैंकों से 4 लाख 18 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज ले रखा है. उल्लेकऩीय है कि यह रकम देश के सकल घरेलू के 4 फीसदी के करीब का है. जाहिर है कि यदि इनका भी हश्र विजय माल्या को दिये कर्ज के समान हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था को जोर का झटका धीरें से लगेगा.


भारतीय बैंकों का सबसे बड़ा कर्जदार अनिल अंबानी की रिलायंस एडीएजी ग्रुप है. अंबानी की इस व्यापार समूह ने बैंकों से 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज ले रखा है. उल्लेखनीय है कि अनिल अंबानी की कंपनी ने मार्च 2015 के बैलेंसशीट में 1 लाख 25 हजार करोड़ का घाटा दिखाया है.

इसके बाद अनिल अग्रवाल की वेदांता समूह ने बैंकों से 90 हजार करोड़ रुपयों का कर्जा लिया है. वेदांता को अगले साल 6 हजार 694 करोड़ रुपयों का तथा उसके बाद अगले दो सालों में प्रतिवर्ष 10 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज लौटाना है.

वहीं, जेपी गौड़ की जयप्रकाश एसोसियेट ग्रुप ने बैंकों से 85 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज लिया है. इस कंपनी ने साल 2006 से साल 2012 के बीच रीयल इस्टेट में करीब 60 करोड़ रुपयों का निवेश किया था. रीयल इस्टेट सेक्टर की हालत खराब होने के कारण इस बात की कम ही उम्मीद है कि इस समूह से पैसे की वसूली की जी सकेगी.

इन सब के बाद देश के चौथे नंबर के बैंकों के कर्जदार गौतम अडानी हैं इन्होंने 72 हजार करोड़ का कर्ज ले रखा है. बताया जा रहा है कि यह कंपनी भारी कर्ज के नीचे दबी हुई है.

इन्हीं की तरह सज्जन जिंदल की जेएसडब्लू ग्रुप ने 58 हजार करोड़ रुपयों का बैंकों से कर्ज ले रखा है.

हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस समाचार समूह के द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ ने उऩके आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2013 से वित्त वर्ष 2015 के बीच 29 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 1.14 लाख करोड़ रुपयों के उधार बट्टे खाते में डाल दिये गये हैं.

रिजर्व बैंक ने इनके नाम नहीं बताये हैं पर इसे आसानी से समझा जा सकता है कि निश्चित तौर पर यह आम जनता को दिये जाने वाले गाड़ी, मकान, शिक्षा या व्यक्तिगत लोन नहीं है. ऐसे मौकों पर तो बैंक वाले आम जनता पर लोटा-कंबल लेकर चढ़ाई कर देती है. जाहिर है कि कार्पोरेट घरानों की इसमें बड़ी हिस्सेदारी तय है.

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