बिहार में बेटियों की संख्या बढ़ी!

पटना | समाचार डेस्क: देश में लिंगानुपात में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. हरियाणा सहित कई राज्यों में लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन बिहार में पिछले 10 वर्षो के दौरान बेटियों की संख्या बढ़ी है, यानी लिंगानुपात में काफी सुधार आया है. यह देश के अन्य राज्यों के लिए सुखद संदेश है.

पिछले 10 वर्षो के दौरान राज्य में बालिकाओं के लिंगानुपात में 41 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है. यह खुलासा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-चार से हुआ है.


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए यह सर्वेक्षण एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च ने 16 मार्च से दो अगस्त, 2015 के बीच किया था. इसके लिए कुल 36,772 घर की 45 हजार 812 महिलाओं और 5,431 पुरुषों से संपर्क किया गया.

एनएएफएचएस-चार की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में वर्ष 2005-06 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-तीन किया था. उस समय राज्य में बालक लिंगानुपात (0 से पांच वर्ष तक) में प्रति हजार में 893 बालिकाएं थीं, जबकि 2015-16 के सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 893 से बढ़कर 934 प्रति हजार हो गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी इलाकों में जहां 942 बालिकाएं प्रति हजार हैं तो ग्रामीण इलाकों में स्थिति बेहतर है. यहां यह आंकड़ा 933 है. इस तरह पिछले 10 वर्षो में बालिकाओं की संख्या में प्रति हजार 41 अंकों की वृद्धि हुई है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की कमान संभालने के बाद लड़कियों के लिए मुख्यमंत्री पोशाक योजना और मुख्यमंत्री साइकिल योजना की शुरुआत की. मुख्यमंत्री इन दोनों योजनाओं की सार्वजनिक मंचों से कई मौकों पर तारीफ भी कर चुके हैं.

बिहार के पूर्व मंत्री और जनता दल युनाइटेड के नेता श्याम रजक भी मानते हैं कि नीतीश कुमार सरकार ने जहां बालिकाओं के लिंगानुपात में सुधार के लिए कई आवश्यक कदम उठाए, वहीं लड़कियों को परिवार पर बोझ नहीं बनने या उनके शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री साइकिल योजना और मुख्यमंत्री पोशाक योजना, मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की.

उल्लेखनीय है कि बिहार के संसदीय कार्यमंत्री श्रवण कुमार ने बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा था, “नीतीश कुमार सरकार राज्य में लिंगानुपात बढ़ाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के साथ महिलाओं के उत्थान के लिए कई नीतियां बनाई हैं. शिक्षा के प्रति छात्राओं के आकर्षण बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिमाग की उपज साइकिल एवं पोशाक योजना के कारण माध्यमिक स्तर तक बालिकाओं की उपस्थिति में गुणात्मक वृद्धि हुई है.”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना को बिहार में पूरी संजीदगी के साथ लागू किया गया है, जिसका प्रतिफल सबके सामने है.

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