छत्तीसगढ़ में बर्डफ्लू की आशंका

रायपुर । एजेंसी: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अचानक हजारों की संख्या में मुर्गियों की मौत होने से बर्डफ्लू की आशंका पैदा हो गई है. चिकित्सकों और प्रशासन की देखरेख में मरी हुई मुर्गियों को दफनाया जा रहा है और राज्यभर में अलर्ट जारी कर दिया गया है. ज्ञात्वय रहे कि यह बीमारी मुर्गियों को होती है मनुष्यों को नही. इससे छत्तीसगढ़ के लोगों को डरने की जरूरत नही है.

राज्य के दुर्ग, बस्तर, बेमेतरा और रायपुर सहित कुछ अन्य जिलों में हजारों मुर्गियों के मरने की खबर से बर्डफ्लू फैलने की आशंका पैदा हो गई है. प्रभावित इलाकों के आस-पास के जिलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा गया है.

सबसे पहले दुर्ग जिले अंजोरा वेटनरी कालेज में मामला सामने आया, जहां 3000 मुर्गियां मर गईं. मुर्गियों की देखभाल करने वाले लोगों को भी मुर्गियों की आकस्मिक मौत का कारण समझ में नहीं आ रहा है. प्रशासन को जब इसकी भनक लगी तो अफसरों ने इनके सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा और मरी हुई मुर्गियों को जमीन में दफना दिया.

दुर्ग की घटना के कुछ ही घंटों बाद बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र में भी दो दिनों के अंतराल में लगभग तीन हजार मुर्गियों की मौत होने की खबर आई. इन मौतों के पीछे बर्डफ्लू होने का अंदेशा है.

इसके अलावा, बलौदा बाजार और बेमेतरा के पोल्ट्री फार्म में भी मुर्गियों के मरने की जानकारी मिली है. पोल्ट्री फार्म प्रबंधकों ने मामले को दबा रखा है, लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि तिल्दा के नजदीक बेलाड़ी के पोल्ट्री फार्म में सैकड़ों की संख्यां में मुर्गियां मरी हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, मरी हुई मुर्गियों को वहीं दफना कर मामला रफा-दफा कर दिया गया है.

बेलाड़ी का पोल्ट्री फार्म भाजपा के एक कद्दावर केंद्रीय नेता का बताया जाता है.

बेमेतरा जिले में साज के पास स्थित एक बड़े पोल्ट्री फार्म में भी मुर्गियों के मरने की जानकारी मिली है.

कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र के स्वास्थ्य संचालक भानु कावड़े ने ढाई से तीन हजार मुर्गियों के मरने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि मुर्गियों के मरने के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

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