देश के दूसरे दामाद बाबू ले डूबेंगे बिहार सीएम को

पटना | एजेंसी: भारतीय राजनीति को दामादों से जल्द छुटकारा नहीं मिलने वाला है. देश के दूसरे सबसे चर्चित दामाद बाबू हैं बिहार के मुखयमंत्री के पीए जिनके कारण जीतन राम मांझी विवादों में फंस गयें हैं. उनके दामाद पर आरोप है कि वही प्रशासन को हुक्म देते रहते हैं. जाहिर है कि देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने के दामाद के समान जीतन राम मांझी के दामाद को लेकर भी विवाद चलता रहेगा. हालांकि, बुधवार देर रात मांझी के दामाद ने पीए पद से इस्तीफा भेज दिया है. उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी एक बार फिर विवाद में घिर गए हैं, परंतु इस बार मामला किसी बयान को लेकर नहीं बल्कि एक रिश्तेदार को निजी सहायक बनाने का है. बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी इसे नियम के विरूद्घ बताते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साध रही है. विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री मांझी ने अपने दामाद और पेशे से इंजीनियर देवेन्द्र कुमार को निजी सहायक बनाया है. इस मामले को लेकर भाजपा ने मुख्यमंत्री पर हमला बोल दिया है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार प्रतिपक्ष के नेता नन्दकिशोर यादव ने कहा कि यह नियमों के खिलाफ है. कोई भी निकट संबंधी को निजी सहायक नहीं बनाया जा सकता है.

इधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का भी कहना है कि यह नियम के विरूद्घ है. उन्होंने कहा कि बिहार में भ्रष्टाचार पराकाष्ठा पर है. उन्होंने कहा कि यह काफी पुराना नियम है कि सगे-संबंधियों को निजी सहायक नहीं बनाया जा सकता.

इस संबंध में जब पत्रकारों ने बुधवार को मुख्यमंत्री से सवाल किया तो वह इस सवाल टाल गए.

इस बीच देवेन्द्र कुमार ने दावा किया है कि वर्ष 2006 में मांझी जब नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में समाज कल्याण मंत्री थे तभी से उनके निजी सहायक के रूप में काम करते आ रहे हैं. मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्हें एक बार फिर निजी सहायक के तौर पर अधिसूचित किया गया है. इसमें आपति क्यों है?

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में जनता दल युनाइटेड की करारी हार के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था.

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