सरकार को अस्थिर करने की कोशिश: नीतीश

पटना | समाचार डेस्क: नीतीश ने पटना में शनिवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा जीतकर इतरा रही है और विपक्ष का उपहास उड़ा रही है. उन्होंने भाजपा पर बिहार सरकार को अस्थिर करने के लिए साजिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के एक नेता के घर में राज्यसभा उपचुनाव के लिए दो प्रत्याशी तय किए गए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू में फूट की कोशिश की जा रही है. भाजपा जल्द चुनाव चाहती है परंतु विधानसभा को पांच वर्ष के लिए जनादेश मिला है, इसलिए पांच वर्ष सरकार चलने देना चाहिए.


गौरतलब है कि जनता दल युनाइटेड के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवारों की जीत के लिए तथा बिहार सरकार को अस्थिर करने की भारतीय जनता पार्टी की साजिश विफल करने के लिए राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य दलों से समर्थन मांगा है. इस बात की जानुकारी उन्होंने पत्रकारों को दी है.

उन्होंने राजद, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को जीतन राम मांझी की सरकार को समर्थन देने पर धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नैतिक मूल्यों पर दिया था, जिसकी मांग भाजपा कर रही थी.

नीतीश ने कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था तभी वे विधानसभा भंग भी कर सकते थे. परंतु हमने यह मुनासिब नहीं समझा. मांझी सरकार बेहतर काम कर रही है और विकास के कार्य हो रहे हैं. उन्होंने कहा, “भाजपा के इरादों को असफल करने के लिए उन्होंने राजद, कांग्रेस और भाकपा से समर्थन की मांग की है और उनके नेताओं से बात की है.”

उल्लेखनीय है कि बिहार राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों में से एक पर जदयू अध्यक्ष शरद यादव निर्विरोध चुन लिए गए हैं. दो सीटों के लिए मतदान की नौबत आ गई है. 19 जून को मतदान होना है. रिक्त हुई तीनों सीटें भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी, लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान और राजद के रामकृपाल यादव के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी. ये सभी 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं.

शरद यादव के निर्वाचित होने के बाद शेष दो सीटों के लिए चार उम्मीदवार -जदयू के पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी तथा निर्दलीय रूप में अनिल शर्मा और साबिर अली- मुकाबले में हैं. बहरहाल, नीतीश कुमार द्वारा अपने धुर विरोधी लालू प्रसाद से समर्थन मांगे जाने से बिहार की राजनीति की ऊंट नया करवट ले सकता है. इसी लिये तो कहा जाता है कि राजनीति में कोई स्थाई शत्रु या दोस्त नहीं होता है.

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