केजरीवाल के मुकाबले कौन?

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली में ताजा विधानसभा चुनाव जल्द ही होने को है. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बार पांच साल सरकार चलाने के वादे के साथ एक बार फिर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरा हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई मुख्यमंत्री उम्मीदवार के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा दिखाने को विवश है.

पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह दिल्ली पर छाने को बेताब केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी की विवशता का आलम यह है कि एक ओर जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी सुरक्षित सीट के अलावा कहीं और से चुनाव लड़ने तक से मना कर दिया है.


भाजपा की सबसे बड़ी विवशता यह है कि इसे मुख्य प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के युवा नेता अरविंद के मुकाबले आखाड़े में उतारने लायक कोई चेहरा नहीं मिल रहा है. पार्टी संगठन की कोशिश हालांकि जारी है, मगर कोई वरिष्ठ नेता इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.

पार्टी सूत्रों ने कहा कि भाजपा अब अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है. एक विकल्प यह कि पार्टी से बाहर का कोई चमकता चेहरा बतौर उम्मीदवार पेश किया जाए या किसी ऐसे युवा कार्यकर्ता का नाम आगे लाया जाए, जिसने नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया हो.

भाजपा के एक नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “पार्टी के जो लोग पिछले चुनाव में जीते थे, वे अपनी सीट छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते. यहां तक कि पार्टी के कई ऐसे वरिष्ठ नेता जिन्हें पिछले चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था, उन्हें इस बार आग्रह कर केजरीवाल के खिलाफ मैदान में उतारने की गुहार लगाई जा रही है, मगर वे राजी नहीं हो रहे हैं.”

नई दिल्ली विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित यहां से लगातार तीन बार जीती थीं, मगर 10 दिसंबर, 2013 को हुए चुनाव में उन्हें पहली बार चुनाव में उतरे अरविंद केजरीवाल ने 20,000 से अधिक मतों से हराकर देश को स्तब्ध कर दिया था. केजरीवाल ने इस बार फिर इसी सीट से भाजपा को ललकारा है.

15 साल के कांग्रेस राज का अंत कर केजरीवाल दिल्ली में अल्पमत सरकार के मुख्यमंत्री बने. उन्होंने 49 दिनों तक सरकार चलाई और जन लोकपाल विधेयक पर बाहर से समर्थन दे रहे कांग्रेस के आठ विधायकों का समर्थन भी विधानसभा में न मिलने के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

याद रहे, आप भ्रष्टाचार-रोधी जन लोकपाल आंदोलन से उपजी हुई पार्टी है. यही इसका मुख्य एजेंडा है.

70 सीटों वाली विधानसभा के लिए आप ने जहां सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है, वहीं कांग्रेस अभी तक 24 उम्मीदवारों के नाम पर ही मुहर लगा पाई है. नई दिल्ली विधानसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम को लेकर कांग्रेस भी अभी तक चुप्पी साधे हुई है. शीला दीक्षित इस बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं, इसलिए कांग्रेस को एक अदद दमदार प्रत्याशी की तलाश है.

सूत्रों का कहना है कि भाजपा 18 जनवरी को उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर सकती है.

भाजपा की राज्य इकाई के कुछ नेता चाहते हैं कि नई दिल्ली सीट से केजरीवाल के मुकाबले पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को उतारा जाए.

किरण बेदी जन लोकपाल आंदोलन में केजरीवाल के साथ थीं. अन्ना हजारे के नेतृत्व में यह आंदोलन ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के बैनर तले चलाया गया था. इसके मंचों से जब तक सिर्फ कांग्रेस को भ्रष्ट बताया जाता रहा, वह साथ रहीं, मगर जब से भाजपा को भी भ्रष्ट बताया जाने लगा, किरण बेदी ने केजरीवाल का साथ छोड़ दिया. किरण का झुकाव भाजपा की ओर रहा है, मगर अभी तक वह भाजपा नेता के रूप में स्वीकार नहीं की जाती हैं.

वहीं भाजपा के कुछ अन्य नेताओं का मानना है कि आप से निष्कासित पूर्व विधायक विनोद कुमार बिन्नी या दो बार हार चुकीं आप की पूर्व नेता शाजिया इल्मी को भाजपा का टिकट देकर केजरीवाल के खिलाफ लड़ाया जाए.

राष्ट्रीय राजधानी में चुनावी बिसात बिछी हुई है. अब दिल्ली के लोगों को तय करना है कि वह नरेंद्र मोदी का चेहरा देख भाजपा के साथ भावनाओं में बहती है, या शासन-तंत्र के रग-रग में समाए भ्रष्टाचार की जंग छुड़ाने के लिए एक बार फिर कमान केजरीवाल के हाथों में सौंपते हैं.

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