बृजमोहन अग्रवाल की होगी विदाई?

रायपुर | संवाददाता : छत्तीसगढ़ के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल क्या हटाये जायेंगे? कम से कम उनके विरोधियों की कोशिश तो यही है. दान की ज़मीन पर करोड़ों का रिसार्ट बनाने के आरोप में उलझे बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ राजनीति तेज़ हो गई है और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कृषि, पशुपालन, मत्स्य और जलसंसाधन जैसा विभाग संभालने वाले बृजमोहन अग्रवाल को हटाया जा सकता है.

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पुराने दिनों की भी याद दिलाई गई है और सूत्रों का कहना है कि पीएमओ तक उन पुराने अखबार के कतरन भी भेजे गये हैं, जब छत्तीसगढ़ राज्य बनने के समय बृजमोहन अग्रवाल को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाये जाने से नाराज अग्रवाल समर्थकों ने भाजपा कार्यालय में जम कर तोड़-फोड़ मचाई थी और आगजनी भी की थी. आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब पर्यवेक्षक बन कर पहुंचे थे और उन्हें भी छुप कर अपने को बचाना पड़ा था.


गौरतलब है कि बृजमोहन अग्रवाल पर महासमुंद के सिरपुर में 4.12 हेक्टेयर सरकारी जमीन अपनी पत्नी सरिता अग्रवाल और बेटे की कंपनी आदित्य सृजन प्राइवेट लिमिटेड और पुरबासा वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर खरीद कर उस पर रिसॉर्ट बनवाने का आरोप है. उक्त जमीन को विष्‍णु साहू नाम के एक ग्रामीण ने वन विभाग को दान किया था.

ज़मीन में गड़बड़ी का यह मामला ठीक ऐसे समय में सामने आया, जब विधानसभा चुनाव में अधिक पैसे खर्च करने के विपक्षी दल कांग्रेस की उम्मीदवार और रायपुर की महापौर किरणमयी नायक द्वारा दायर याचिका में हाईकोर्ट ने उन्हें निर्दोष ठहराया. किरणमयी नायक के इस मामले को लेकर माना जा रहा था कि यह बृजमोहन अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. उनका हश्र भी मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा जैसे होने की अफवाहें हवा में तैर रही थीं लेकिन बृजमोहन अग्रवाल कम से कम हाईकोर्ट से इस मामले में बेदाग आ गये. लेकिन अखबारों में विज्ञापन और मित्रों की पार्टियां अभी ठीक-ठीक परवान भी नहीं चढ़ी थी कि ज़मीन घोटाले का मामला सामने आ गया.

हालांकि बृजमोहन अग्रवाल का दावा है कि ज़मीन जब खरीदी गई तब भी जमीन विष्णु साहू के नाम पर ही थी. उन्होंने चुनौती दी कि इस मामले की जांच में अगर कुछ भी गलत पाया जाता है तो वे ज़मीन लौटा देंगे. लेकिन इस सफाई के बीच कुछ और ज़मीनों के मामले सामने आ गये. बृजमोहन अग्रवाल ने तब पत्रकारों से बातचीत में कहा- ऐसे पांच-छह मामले और सामने आ सकते हैं और विरोधी मेरी छवि खराब करने के लिये ऐसा कर रहे हैं.

लेकिन इस मामले में जांच रिपोर्ट पर जब कार्रवाई की बात हुई तो राज्य के मुखिया रमन सिंह ने सफाई या बचाव के बजाये साफ कह दिया कि पूरा मामला केंद्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाया गया है और फैसला केंद्रीय नेतृत्व लेगा.

रमन सिंह के इस कहे के निहितार्थ को समझने की कोशिश चल रही है और कई आंकड़ों और तथ्यों को जोड़ने-घटाने के बाद कहा जा रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल की मुश्किलें अब कम होने के बजाये बढ़ने वाली हैं. हालांकि बृजमोहन अग्रवाल फिलहाल दिल्ली में हैं और इस बात को लेकर आश्वस्त बताये जा रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. इस बीच कांग्रेस ने बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ अलग से मोर्चा खोल रखा है.कांग्रेस की नाराजगी सरकार से इस बात को लेकर भी है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल के खिलाफ तो सरकार ने एक के बाद एक जमीन घोटालों की जांच करवा दी लेकिन बृजमोहन अग्रवाल के मामले में सरकार चुप है. अजीत जोगी की पार्टी भी इस मामले में सक्रिय है. ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व को ज़ीरो टालरेंस का हवाला दे कर क्या कुछ किया जा सकता है, सबकी निगाहें इसी पर लगी हुई हैं.

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