SPG के निर्देशानुसार बंगला लिया

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मकान किराया विवाद पर प्रियंका ने कहा कि एसपीजी के निर्देशानुसार उन्होंने बंगला लिया. उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि कभी भी बंगले का किराया कम करने के लिये केन्द्र सरकार से नहीं कहा था. चूंकि एसपीजी को सुरक्षा कारणों से अन्य कहीं निवास लेने से कठिनाई आ रही थी इसीलिये उन्होंने यह बंगला लिया था. साथ ही प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने बंगले का किराया बराबर चुकाया है. खबर में यह भी कहा गया है कि अभी लोधी एस्टेट स्थित टाइप छह सरकारी आवास का किराया प्रियंका गांधी 31 हजार रुपये देती हैं.

यह भी कहा गया है कि पंजाब के पूर्व डीजीपी के.पी.एस. गिल, ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष एम.एस. बिट्टा और अश्विनी कुमार को सुरक्षा कारणों के आधार पर ही सरकारी आवास मुहैया कराया गया है.


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को कहा कि उनके सरकारी आवास का किराया उनकी श्रेणी के अन्य आवासों के बराबर है और वह नियमित रूप से अपने मकान का किराया चुकाती हैं.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों के आधार पर उन्हें उस परिसर में रहने के लिए कहा गया है.

प्रियंका के कार्यालय से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने विशेष लाइसेंस शुल्क जो तय किया है, उसका भुगतान नियमित रूप से किया गया है.

यह विज्ञप्ति तब जारी हुई है, जब ऐसी खबरें आईं कि अपने आवास का किराया 53 हजार 421 रुपये प्रतिमाह से घटाकर 8 हजार 888 रुपये कराने के लिए प्रियंका गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से संपर्क किया था.

खबर में सूचना के अधिकार के तहत मिले एक सवाल के जवाब का उल्लेख किया गया है.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रियंका को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा प्राप्त है. दिसंबर 1996 में उन्हें एक निजी आवास मुहैया कराया गया और उसके नवीनीकरण का काम शुरू करने के अलावा उसका अग्रिम किराया भुगतान किया गया था.

तत्कालीन एसपीजी निदेशक ने उन्हें सरकारी सुरक्षा एजेंसियों की किराए के निजी आवास में उन्हें रहने देने से मना करने के फैसले की जानकारी दी थी. ऐसा इस वजह से कि उसमें सुरक्षा कर्मियों के रहने, सुरक्षा वाहनों के रखने, निकलने कई रास्ते, भवन की दीवारों का किसी से साझा नहीं होना जैसे सुरक्षा की जरूरतों को पूरी करने की व्यवस्था नहीं थी.

उसी के बाद उन्हें सुरक्षा के आधार पर सरकारी आवास मुहैया कराने का निर्देश दिया गया.

कहा गया है कि तत्कालीन भाजपा सरकार के सभी नियमों का पालन किया गया है. जिस अवधि पर सवाल खड़ा किया गया है उस अवधि का भी किराया सहित सभी भुगतान नियमित रूप से किए गए हैं.

खबरों में कहा गया है कि प्रियंका गांधी ने वर्ष 2002 के मई में सरकार को लिखा था कि 53 हजार 421 रुपये किराया बहुत अधिक है और उनके भुगतान की क्षमता से बाहर है.

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