क्या माल्या से कर्ज वसूला जा सकेगा?

नई दिल्ली | जेके कर: विजय माल्या के पासपोर्ट के निलंबित करने के बाद भी सवाल उठता है कि कर्ज की वसूली हो सकेगी? विजय माल्या ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से 9000 करोड़ रुपयों का कर्ज ले रखा है. जाहिर है कि बैंकों के पैसे का अर्थ उसमें जमा आम जनता के गाढ़ी कमाई के बचत से है. जिस तरह से कर्ज के पैसों से अय्याशी की गई है उससे शक होता है कि माल्या इन्हें लौटाने की हालत में नहीं हैं.

यदि माल्या बैंक के पैसे लौटा सकते तो देश छोड़कर भागते क्यों? इसी से जुड़ा सवाल है कि घर, दोपहिया वाहन तथा शिक्षा के लिये कर्ज की वसूली के लिये छोटे कर्जदारों पर लोटा-कंबल लेकर चढ़ाई कर देने वाले बैंक आखिरकार माल्या जैसे बड़े आसामी के मामलें में हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे. हैरत की बात है कि देश की जनता के इतने बड़े कर्जदार को आसानी से भाग जाने दिया जाता है. वह भी हवाई जहाज से पासपोर्ट दिखाकर, भेष बदलकर नहीं.


उल्लेखनीय है कि विजय माल्या ने किंग फिशर को अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइन बनाने के लिये कैप्टन गोपीनाथ की एयर डेकन को बिना किसी बैलेंस शीट को देखे ही 1 हजार करोड़ रुपयों में खरीद लिया था. बताया जाता है कि माल्या ने एक दिन अपने लक्जरी याट से फोन करके एयर डेकन को खरीद लिया था. उन्होंने इस कंपनी की बैलेंस शीट तक न देखी. पैसा चुकाया गया जनता के पैसों से.

विजय माल्या अपने पेज थ्री पार्टियों के लिये भी अक्सर सुर्खियों में बने रहते थे. पहले वे शराब का कारोबार करते थे. उऩके साथ सुंदरियों के फोटो तक अखबारों तथा पत्रिकायों के कव्हर पेज पर छपा करते थे. ऐसे में यह सवाल किया जाना चाहिये कि बैंकों ने किस आधार पर उन्हें 9000 करोड़ रुपयों का कर्ज दे डाला है.

दूसरी तरफ देश के किसान कर्ज न चुका पाने के लिये आत्महत्या करने को मजबूर हैं. सूखे से फसल बर्बाद होते देख किसान आत्महत्या कर रहें हैं. मामला कुछ एक लाख या हजार रुपयों का ही होता है. किसान जो देश के लिये अन्न का उत्पादन करते हैं उनके साथ साहूकार तथा बैंक कड़ाई से पेश आते हैं अन्यथा क्या कारण है कि वे आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं.

सामाजिक न्याय का तकाज़ा है कि जब तक बैंक विजय माल्या जैसे बड़े कर्जदार से अपने 9000 करोड़ रुपये वसूल न कर ले उन्हें किसानों से कर्ज की वसूली स्थगित कर देनी चाहिये. सरकार को भी देश के अन्नदाता को बचाने के लिये साहूकारों से लिये कर्ज की वसूली पर रोक लगा देनी चाहिये. एक आकलन के अनुसार 9000 करोड़ रुपयों से देश के 4 लाख 50 हजार किसानों को दो-दो लाख रुपयों का कर्ज दिया जा सकता था.

यदि किसानों को अन्न के उत्पादन के लिये कर्ज दिया गया होता तो इसे ‘बैड लोन’ नहीं ‘गुड लोन’ कहा जा सकता था. जाहिर है कि व्यवस्था ही ऐसी है कि बड़ों को बड़ा कर्ज तथा चोटों के साथ कड़ाई से पेश आना नियति बन गई है.

एत तरफ अय्याश विजय माल्या है तो दूसरी तरफ देश का गरीब किसान. दोनों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है. एक जनता के पैसे को शराब तथा शबाब में डुबो रहा है तो दूसरा देश के लिये अपनी जीवन समाप्त कर रहा है. किसान के पास भागने के लिये कोई जरिया नहीं है. उसे तो अपने गांव के किसी पेड़ पर लटककर जान देना है या जहर खाकर. अन्नदाता के साथ ऐसी बेरुखी क्यों?

कर्ज नहीं चुकाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या का राजनयिक पासपोर्ट तत्काल प्रभाव से चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है. यह घोषणा शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने की. प्रवर्तन निदेशालय माल्या पर बैंकों के 9,000 करोड़ रुपये के गबन के आरोप की जांच कर रहा है. माल्या अभी ब्रिटेन में हैं. क्या जनता का पैसा लुटाने के लिये बैंकों के पास जमा रखा जाता है.

मंत्रालय ने साथ ही कहा कि माल्या यदि एक सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब नहीं देंगे, तो उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाएगा.

मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान कहा, “प्रवर्तन निदेशालय की सलाह पर विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट जारी करने वाले विभाग ने आज विजय माल्या के राजनयिक पासपोर्ट की वैधता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी.”

पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 10 ए के तहत पासपोर्ट निलंबित करते हुए मंत्रालय ने कहा कि माल्या को एक सप्ताह के भीतर इस सवाल का जवाब देने के लिए कहा गया है कि पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10 (3)(सी) के तहत उनके पासपोर्ट को जब्त क्यों नहीं किया जा सकता है.

बयान में कहा गया है, “यदि वह समय सीमा के भीतर जवाब देने में असफल रहेंगे, तो माना जाएगा कि उनके पास कोई जवाब नहीं है और मंत्रालय पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी.” (एजेंसी इनपुट के साथ)

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