कोल ब्लॉक आवंटन रद्द करें: ग्रीनपीस

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: ग्रीनपीस ने मांग की है कि कोल ब्लाक आवंटन को रद्द कर दिया जाये. गौरतलब है कि ग्रीनपीस कोल ब्लाक आवंटन को लेकर हुए धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाता रहा है. सोमवार को ग्रीनपीस ने कोयला ब्लॉक आवंटन पर आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है. न्यायालय ने कोयला ब्लॉक आवंटनों को अवैध करार दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में 1993 से 2010 तक के सभी कोल ब्लॉक आवंटनों को अवैध घोषित कर दिया है. आवंटन को रद्द करने पर फैसला एक सितम्बर को सुनाया जाएगा.

ग्रीनपीस की कैंपेनर अरुंधती मत्थु ने कहा, “काफी समय से ग्रीनपीस कोयला खदान आवंटन में हुई अनियमिततओं पर सवाल उठाता रहा है. दुर्भाग्य से इन परियोजनाओं को देर से पर्यावरण मंजूरी मिलने पर इसे व्यवस्थागत बाधा माना गया लेकिन आज यह साबित हो गया कि इस देश में कोयला संकट भ्रष्टाचार और औद्योगिक नीतियों का नतीजा है.”

सर्वोच्च न्यायालय ने स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा दिए गए सारे आवंटन को अवैध बताया है. सिंगरौली के महान कोल ब्लॉक को भी इसी अवधि में आवंटित किया गया था.

महान कोल के मामले में भी कोयला मंत्रालय के स्क्रीनिंग कमेटी के मिनट्स और सीएजी कागजात बताते हैं कि महान का आवंटन एस्सार और हिंडाल्को को एक मार्च, 2005 को स्क्रीनिंग कमेटी की 27वीं बैठक में लिया गया, लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि एस्सार महान के पक्ष में नहीं था.

मुत्थु ने कहा, “सिर्फ हिंडाल्को महान के पक्ष में था. मध्य प्रदेश सरकार ने ऑन रिकॉर्ड कहा था कि यह खदान मध्य प्रदेश खनिज विकास निगम को दिया जाना चाहिए. हमारे पास उस बैठक की मिनट्स है. हमारे उस आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया जिसमें हमने जानना चाहा था कि आखिर क्यों मध्य प्रदेश सरकार ने एस्सार के पक्ष में अपने फैसले को बदला.”

मुत्थु ने कहा कि उद्योग के लोगों को फायदे पहुंचाने के लिए महान क्षेत्र के 54 गांव के 50 हजार से अधिक लोगों की जीविका को खत्म किया जा रहा है.

मुत्थु ने कहा, “इन सबमें फायदा एस्सार और हिंडाल्को को ही होगा. इसलिए जब तक आवंटन को लेकर कोई फैसला नहीं आ जाता हमें नए कोयला खदानों के आवंटन तथा उनके पर्यावरण मंजूरी पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है.”

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