सचिव बहाना, केजरीवाल निशाना?

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई छापे पर प्रतिक्रिया आने लगी है. इसे विपक्षी दलों द्वारा इसे संघीय ढ़ांचे पर हमला तथा राजनीतिक गरिमा का निम्न स्तर करार दिया जा रहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि सीबीआई ने दिल्ली सचिवालय स्थित उनके दफ्तर पर छापा मारा. उन्होंने इसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें ‘कायर व मनोरोगी’ करार दिया. सीबीआई ने हालांकि स्पष्ट किया कि छापामारी मुख्यमंत्री केजरीवाल नहीं बल्कि उनके सचिव राजेंद्र कुमार के खिलाफ की गई है. वहीं, इस मामले में एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने मोदी का बचाव करते हुए कहा कि छापामारी से मोदी का कोई लेना-देना नहीं है.

अपने दफ्तर पर सीबीआई की छापामारी से बौखलाए केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा, “मोदी कायर और मनोरोगी हैं.”


उन्होंने इससे पहले ट्विटर पर लिखा था, “सीबीआई ने मेरे कार्यालय पर छापामारी की. मोदी जब मुझे राजनीतिक रूप से नहीं संभाल पाए, तो इस कायरता पर उतर आए.”

वहीं, सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि केजरीवाल के सचिव राजेंद्र कुमार के खिलाफ अपने सरकारी पद का दुरुपयोग कर पिछले कुछ सालों में एक कंपनी को दिल्ली सरकार के विभागों से टेंडर दिलाने का मामला दर्ज कराया गया है.

अधिकारी ने कहा, “वारंट लेने के बाद ही राजेंद्र कुमार के आवास व दफ्तर की तलाशी ली जा रही है. कुमार के खिलाफ आरोप दिल्ली संवाद आयोग के सदस्य सचिव आशीष कुमार जोशी ने लगाए हैं.”

केजरीवाल ने इसके जवाब में कहा, “सीबीआई झूठ बोल रही है. मेरे खुद के दफ्तर पर छापा मारा गया है. मुख्यमंत्री के दफ्तर की फाइलों को खंगाला जा रहा है. मोदी बताएं कि उन्हें कौन सी फाइल चाहिए?”

केजरीवाल ने कहा कि राजेंद्र तो महज एक बहाना है, दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय को खंगाला जा रहा है.

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट की झड़ी लगाते हुए कहा, “मैं ही ऐसा इकलौता मुख्यमंत्री हूं, जिसने स्वयं भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपने एक मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी को बर्खास्त किया और उनके मामलों को सीबीआई को सौंप दिया.”

ऐसा कहकर वह नौ अक्टूबर को एक बिल्डर से रिश्वत मांगने के मामले में बर्खास्त किए गए अपने खाद्य मंत्री असीम अहमद खान की ओर इशारा कर रहे थे.

केजरीवाल ने कहा, “अगर सीबीआई के पास राजेंद्र के खिलाफ कोई भी सबूत था, तो उसने इसे मारे साथ साझा क्यों नहीं किया? मैं उनके खिलाफ कार्रवाई करता.”

केन्द्र सरकार का पक्ष-
केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई की छापामारी का प्रधानमंत्री से कोई लेना-देना नहीं है.

नायडू ने यहां संवाददाताओं को बताया, “सीबीआई एक स्वतंत्र संगठन है. सरकार इसमें कतई हस्तक्षेप नहीं करती है. आप केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को कैसे आड़े हाथों ले सकते हैं? प्रधानमंत्री का इससे कुछ लेना-देना नहीं है.”

उन्होंने कहा, “दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए तो हर बात में केंद्र सरकार से तकरार करना और प्रधानमंत्री का नाम लेना फैशन हो गया है.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “सीबीआई सरकार की छत्रछाया में काम नहीं करती है. वे दिन लद गए हैं, जब कांग्रेस सीबीआई का दुरुपयोग करती थी.”

उधर, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया और कहा, “एजेंसी के काम के बारे में मंत्रियों से मत पूछिए.”

छापे पर प्रतिक्रिया-
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्विटर पर लिखा कि सीबीआई छापामारी का डर दिखाकर ईमानदारी वाली राजनीति को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि लोग सच के साथ हैं और वे लोग अपने इरादों में सफल नहीं होने पाएंगे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘अभूतपूर्व’ करार दिया. ममता ने ट्विटर पर लिखा, “मुख्यमंत्री के कार्यालय को सील करना एक अनोखी घटना है. मैं इस कार्रवाई से हैरान हूं.”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कमल नाथ ने कहा कि सीबीआई की यह कार्रवाई देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है.

उन्होंने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा, “यह संघवाद की भावना के खिलाफ है.”

कांग्रेसी नेता अहमद पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार गैर-राजग नेताओं को डरा रही है.

पटेल ने ट्वीट में लिखा, “उनका केवल एक ही एजेंडा है कि गैर-राजग नेताओं को धमकाने और चुप कराने के लिए राज्य की सत्ता के हर साधन का उपयोग किया जाए.”

जनता दल युनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई की छापामारी पर संदेह जताया.

उन्होंने संसद के बाहर संवाददाताओं को बताया, “उन्हें कार्रवाई के बारे में मुख्यमंत्री को सूचित करना चाहिए था. उन्हें विश्वास में लेना चाहिए था.”

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मंगलवार को कहा कि यह कार्रवाई निंदनीय है और यह राजनीतिक दुर्भावना से किया गया कृत्य है. माकपा ने एक बयान में कहा, “ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी नौकरशाह के खिलाफ जांच के नाम पर मुख्यमंत्री के कार्यालय को सील कर दिया जाए और उनकी फाइलें खंगाली जाएं.”

माकपा ने कहा, “अगर सीबीआई सचमुच किसी नौकरशाह की ही जांच कर रही थी, जिसका कार्यालय मुख्यमंत्री कार्यालय के तल पर ही था तो इसके लिए मुख्यमंत्री की सलाह क्यों नहीं ली गई?”

माकपा ने कहा, “यह घटना मोदी सरकार द्वारा सत्तारूढ़ गैर भाजपाई सरकारों के अधिकारों और गरिमा पर अतिक्रमण के निम्न स्तर को दर्शाती है.”

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