सीबीआई ‘तोता’ स्वायत्ता की ओर

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: अभियोजन निदेशालय को अब सीबीआई निदेशक के अधीन कर दिया गया है. इससे पहले अभियोजन इकाई कानून मंत्रायस को रिपोर्ट करती थी. इसी के साथ ही पदोन्नति तथा पदस्थापना काम सीबीआई निदेशक किया करेंगे. उसी के साथ एजेंसी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट भी अब सीबीआई के निदेशक ही दिया करेंगे.

अब तक यह दोनों काम कानून मंत्रालय के जिम्में था. इस कदम से अभियोजन तैयार करने में सीबीआई निदेशक का फैसला अंतिम माना जायेगा. पहले ऐसा नहीं होता था. देखा गया है कि कई बार अभियोजन, सीबीआई के जांच को पलट देता था. जिससे आरोपी के खिलाफ मजबूत केस नहीं बन पाता था तथा आरोपी छूट जाया करता था.

सरकार के इस कदम से सीबीआई को स्वायत्त बनाने के दिशा में माना जा रहा है. गौरतलब है कि कुछ माह पहले सर्वोच्य न्यायालय ने सीबीआई को सरकारी तोते की संज्ञा दी थी. हालांकि सीबीआई को स्वायत्ता देने की मांग पहले से किया जा रहा था.लेकिन सर्वोच्य न्यायालय के उस टिप्पणई से सीबीआई तथा केन्द्र सरकार की अच्छी-खासी किरकिरी हुई थी. मौजूदा कदम से सीबीआई निदेशक के अधिकार में बढ़ोतरी होगी तथा कानून मंत्रालय का हस्तक्षेप भी कम होगा.

ज्ञात्वय रहें कि संसद के शीतकालीन सत्र में पारित लोकपाल विधेयक में भी अभियोजन को सीबीआई निदेशक के अधीन रखने की बात की गई है. लोकपाल विधेयक में कहा गया है कि अभियोजन निदेशक की नियुक्ति लोकपाल तथा मुख्य सतर्कता आयुक्त से विचार विमर्श के बाद ही किया जायेगा. इस प्रकार से अब कहा जा सकता है कि सीबीआई स्वायत्ता की ओर बढ़ रहा है.

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