रमन सिंह व 4 मंत्रियों पर घूसखोरी का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने शनिवार को इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले मामले के मुख्य अरोपियों में से एक बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा के नार्को टेस्ट की सीडी जारी करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह समेत चार मंत्रियों और एक पूर्व डीजीपी पर मामले में घूस लेने का आरोप लगाया. हालांकि राज्य सरकार ने सीडी को ही फर्जी करार दिया है.

गौरतलब है कि रायपुर स्थित सदर बाजार के इंदिरा प्रियदर्शनी महिला नागरिक सहकारी बैंक का संचालन एकाएक 2 जुलाई 2006 को बंद कर दिया गया था. इस दौरान बैंक में 54 करोड़ रूपए का घोटाला हुआ था. इसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया था. बैंक में गड़बड़ी की जानकारी सबसे पहले 3 अक्टूबर 2007 को उस समय सामने आई जब ऑडिट किया गया.


ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि इस बैंक में 2003 से 2006 के बीच कई मदों में जमा राशि सहित 25716 खातेदारों द्वारा जमा की गई 54 करोड़ 38 लाख से अधिक की राशि का गबन कर लिया गया है. गबन के कारण बैंक की भुगतान क्षमता समाप्त हो गई. इसके बाद आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया.

सीडी जारी करते हुए पूर्व मंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि दिवंगत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल इस सीडी को लेकर खुलासा करने वाले थे लेकिन उससे पहले ही उनकी हत्या हो गई.

उन्होंने यह भी कहा कि नक्सली हमले में मारे गए नंदकुमार पटेल के बेटे दिनेश पटेल ने एक एसएमएस के जरिए कहा था कि वे सरकार के खिलाफ ऐसा एक भंडाफोड़ करने वाले हैं जिससे सरकार गिर जाएगी वे इसी सीडी की बात कर रहे थे.

बघेल ने सीडी के हवाले से दावा किया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनकी सरकार के मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, राम विचार नेताम, अमर अग्रवाल और राजेश मूणत को बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा ने एक-एक करोड़ रुपए दिए थे. इसके अलावा तत्कालीन डीजीपी ओ पी राठौड़ को भी एक करोड़ रुपए दिए जाने की बात कही गई है.

उन्होंने सवाल किया है कि क्यों सरकार ने इतने बड़े घोटाले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग नहीं है और कहा है कि रमन सरकार को मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि 2007 में राज्य में का इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाला हुआ था जिसमें 25 हजार खातेदारों के 47 करोड़ रुपए डूब गए थे.

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