लोक की छोड़िये, परलोक सुधारिये

रायपुर: चुनावी वैतरणी पार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के बुजुर्गो को मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत तीर्थ स्थलों की निशुल्क तीर्थ यात्राएं करवा रही है. राज्य सरकार द्वारा मुफ्त में यात्रा करवाना तब बिल्कुल तर्कसंगत लगता है जब जीडीपी और विकास दर की दौड़ में बाकी राज्यों से लगातार पिछड़ते जा रहे छत्तीसगढ़ के कुछ आंकड़ों पर नज़र डाली जाए.

आंकडों बताते हैं कि साल 2011-12 के दौरान छत्तीसगढ़ की वार्षिक प्रति व्यक्ति आय 46,573 रुपये रही. जिसका अर्थ यह होता है कि प्रति व्यक्ति प्रतिमाह आय है मात्र 3881 रुपये. अब जाहिर है महंगाई के इस दौर में इतने पैसों में स्वयं से तो कोई तीर्थ यात्रा कर नहीं पाएगा.

कुछ दूसरे राज्यों को देखें तो पता चलेगा कि वार्षिक प्रति व्यक्ति आय के मामले में छत्तीसगढ़ 16 वें पायदान पर है. गोवा जिसकी प्रति व्यक्ति आय 1,92,652 है, की तुलना में छत्तीसगढ़ 1,46,079 रुपये पीछे है. दिल्ली, अंडमान-निकोबार, तमिलनाडु, केरल और हरियाणा का प्रति व्यक्ति आय क्रमशः 1,75,812 रुपये, 82,272 रुपये, 84,058 रुपये, 83,725 रुपये तथा हरियाणा का 1,09,227 रुपये है. इनकी तुलना में छत्तीसगढ़ एक पिछड़ा राज्य दिखता है.

यहां यह सवाल उठता है कि पर्यटन पर आधारित गोवा की यदि इतनी आय है तो प्राकृतिक संसाधनो से भरपूर छत्तीसगढ़ इतना पिछड़ा क्यों है. छत्तीसगढ़ स्थित बिलासपुर रेल्वे जोन सर्वाधिक आय देता है. यहां कोयले का भरपूर भंडार है. अयस्को की मात्रा भरपूर है. कुल जमा जमीन के ऊपर तथा नीचे का भंडार भरपूर है.

वैसे तो विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के लिए अपने धर्म के तीर्थ स्थल की यात्रा करना बड़ा महत्व रखती है. अधिकांश धर्मावलंबियों का मानना है कि तीर्थ स्थलों की यात्रा से ही उनके लोक-परलोक सुधारते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार लोगों को निशुल्क तीर्थ यात्रा करवाने के बजाए यदि इनके आय बढ़ाने के उपाय करे तो बुजुर्गो को तीर्थ यात्रा के लिये दूसरो का मुह नही देखना पड़ेगा.

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