छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी भर्ती 2019 : रोड़ा कहां है?

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी भर्ती 2019 की उम्मीदें क्या पूरी होंगी? राज्य की नई सरकार ने 15 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात तो कही है. लेकिन इसके कई पेंच अभी भी फंसे हुये हैं.

2017 में राज्य की रमन सिंह सरकार ने 45000 शिक्षाकर्मियों की भर्ती की घोषणा की थी. लेकिन भाजपा सरकार की यह घोषणा महज घोषणा रह गई. चुनावी साल यानी 2018 में भी रमन सिंह ने आश्वस्त किया था कि शिक्षाकर्मी भर्ती को लेकर सरकार गंभीर है.


हालांकि शिक्षाकर्मियों ने उनके इस दावे को ही गंभीरता से नहीं लिया. माना जाता है कि इस वर्ग की नाराज़गी ने रमन सिंह सरकार की विदाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

पिछली सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलयन का निर्णय लेकर इस वर्ग को खुश करने की कोशिश की थी. सरकार ने आठ साल की सेवा पूरी कर चुके एक लाख से अधिक शिक्षाकर्मियों को नियमित भी कर दिया. शेष बचे 75 हज़ार शिक्षकों को इसी तरह आठ-आठ साल की सेवा पूरी करने पर संविलयन का आश्वासन दिया था.

इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया कि 2 साल की सेवा पूरी कर चुके सभी लोगों का संविलय किया जायेगा.

बजट सत्र में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आश्वस्त किया है कि शिक्षाकर्मियों की मांग पर सरकार गंभीर है. हालांकि मुख्यमंत्री ने इसके लिये शिक्षाकर्मियों को थोड़ी प्रतीक्षा करने की बात कही है.

लेकिन तब भी यह सवाल फिर से सामने है कि क्या राज्य सरकार शिक्षाकर्मियों के पद पर नई भर्ती करेगी?

शिक्षाकर्मी भर्ती के रोड़े

राज्य की सरकार ने 15 हज़ार शिक्षकों की भर्ती की बात कही है. लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षाकर्मी अभी भी हैं, जिनका संविलयन नहीं हुआ है. ऐसे लोगों की संख्या 75 हज़ार है.

जाहिर है, बिना संविलयन के शिक्षक के पद पर 15 हजार नई भर्ती के आड़े सबसे पहले यही शिक्षाकर्मी आयेंगे.

पहले से काम कर रहे शिक्षाकर्मियों की पहली प्राथमिकता पंचायत विभाग से शिक्षा विभाग में संविलयन होगी. ऐसे में नये पदों पर भर्ती के खिलाफ ये शिक्षाकर्मी अदालत की राह अपना सकते हैं.

राज्य सरकार अगर शिक्षाकर्मियों को प्रतीक्षा करने के लिये कह रही है तो उसका मतलब बहुत साफ है कि सरकार कम से कम इनके संविलयन के पहले शिक्षक के पदों पर नई भर्ती करने से तो रही.

बढ़ती बेरोजगारी

राज्य में 23 लाख 25 हज़ार, 85 पंजीकृत बेरोजगार हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या दुर्ग ज़िले के बेरोजगारों की है, जिनकी संख्या 2 लाख 88 हज़ार 487 है.

पंजीकृत बेरोजगारों के मामले में राजनांदगांव दूसरे नंबर पर है, जहां 1 लाख 79 हज़ार 520 बेरोजगार बसते हैं.

यही हाल रायगढ़ का है, जहां 1 लाख 75 हज़ार 312 बेरोजगार पंजीकृत हैं.

पंजीकृत बेरोजगारों की तुलना में राज्य में लगभग दोगुने अपंजीकृत बेरोजगार हैं और साल दर साल यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है.

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