राजा-कनिमोझी के लिखाफ आरोपपत्र दाखिल

नई दिल्ली | एजेंसी: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी सहित 19 व्यक्तियों के खिलाफ यहां शुक्रवार को एक अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है.

तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद दाखिल यह आरोपपत्र 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में धन की हेराफेरी से संबद्ध विषय पर दाखिल किया गया है.


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया, जिन्होंने अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तिथि तय की.

आरोपपत्र में शामिल किए गए अन्य लोगों में हैं दयालु अम्माल (डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि की पत्नी), स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, कुसेगांव फ्रुट्स एंड वेजीटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड (केएफवीपीएल) के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, बॉलीवुड के फिल्म निर्माता करीम मोरानी, कलैगनार टीवी के निदेशक शरद कुमार और पी. अमिरथन.

आरोपपत्र में नामित कंपनियों में हैं स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल), कुसेगांव रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, सिनेयुग मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (सिनेयुग फिल्म्स), कलैगनार टीवी प्राइवेट लिमिटेड (केटीवी), डायनामिक्स रियल्टी, एवरस्माइल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, कॉनवुड कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स (पी) लिमिटेड, डीबी रियल्टी लिमिटेड और निहार कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड.

आरोपियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंडरिंग एक्ट (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद किया गया है.

ईडी के वकील एन.के. मट्टा ने विशेष अदालत को कहा, “जांच से पता चलता है कि एसटीपीएल के प्रमोटरों ने अपने समूह की कंपनी डायनामिक्स रियल्टी का उपयोग करते हुए केएफवीपीएल और सीएफपीएल (सिनेयुग फिल्म्स) के जरिए केटीवी को 200 करोड़ रुपये का भुगतान किया. यह भुगतान वैध वित्तीय लेन-देन के रूप में यानी, कर्ज/शेयर अप्लीकेशन राशि के रूप में किया गया.”

मट्टा ने कहा कि यह भुगतान राजा और उनके सहयोगियों के लिए और उनकी ओर से यूएएस लाइसेंस आवंटन के लिए एसटीपीएल का अवैध रूप से पक्ष लेने के बदले किया गया था.

ईडी ने कहा कि जांच से पता चलता है कि 200 करोड़ रुपये की राशि की वापसी अतिरिक्त राशि के साथ की गई, ताकि इस अवैध राशि को वैध राशि और वैध लेन-देन के रूप में दिखाया जा सके.

ईडी ने कहा, “इस प्रकार कर्ज के रूप में यह वास्तव में अवैध रिश्वत था, जिसे सफेद धन के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश की गई.”

ईडी ने कहा कि राशि की वापसी से फिर एक बार फिर अपराध के धन को सफेद धन दिखाने की कोशिश की गई, जो कुछ और नहीं बल्कि धन की हेराफेरी की प्रक्रिया है.

जांच एजेंसी ने कहा कि 223.55 करोड़ रुपये की पूरी राशि वास्तव में अपराध की कमाई है.

एजेंसी ने कहा कि आरोपी व्यक्तियों/कंपनियों द्वारा काले धन को सफेद दिखाने की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न की गई. पहली, जब डायनामिक्स रियल्टी से धन केटीवी में भेजा गया और फिर जब यह राशि केटीवी से वापस डायनामिक्स रियल्टी को भेजा गया.

जांच एजेंसी ने कहा, “दोनों ही दिशाओं के लेनेदेन में यानी, राशि को केटीवी को देने और उसकी वापसी में आरोपी व्यक्तियों और कंपनियों ने इस लेन-देन को नियमित कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाते हुए इसके वास्तविक रूप को छुपाने की कोशिश की.”

ईडी ने कहा, “अवैध रिश्वतबाजी को छुपाने के लिए संदिग्ध लेन-देन अवैध राशि को वैध दिखाने की प्रक्रिया है और यह पूरी तरह से पीएमएलए के प्रावधानों के दायरे में आती है.”

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