बस्तर के टार्जन चेन्दरू का निधन

जगदलपुर | संवाददाता: बस्तर के टार्जन कहे जाने वाले चेन्दरू का आज निधन हो गया. वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे. आज दोपहर उन्होंने अंतिम सांस ली.

साल 1957 में ऑस्कर अवार्ड विजेता आर्ने सक्सडॉर्फ ने स्वीडिश में ‘एन द जंगल सागा’ नाम से फ़िल्म बनाई थी, जिसे अंग्रेज़ी में ‘दि फ्लूट एंड दि एरो’ नाम से जारी किया गया था.


इस फ़िल्म में 10 साल के चेंदरू ने बाघों और तेंदुओं के साथ काम किया था.उस समय आर्ने सक्सडॉर्फ ने लगभग दो साल तक बस्तर में रह कर पूरी फ़िल्म की शूटिंग की थी.

फ़िल्म में लगभग 10 बाघ और आधा दर्जन तेंदुओं का उपयोग किया गया था. फ़िल्म में दिखाया गया था कि किस तरह चेंदरू का दोस्त गिंजो एक मानवभक्षी तेंदुए को मारते हुए ख़ुद मारा गया और उसके बाद चेंदरू की किस तरह बाघ और तेंदुओं से दोस्ती हो गई. जब फ़िल्म का प्रदर्शन हुआ तो चेंदरू को भी स्वीडन समेत दूसरे देशों में ले जाया गया.

साल 1958 में कान फिल्‍म फेस्टिवल में भी यह फ़िल्म प्रदर्शित हुई. गढ़बेंगाल गांव से कभी बाहर नहीं गए चेंदरू फ़िल्म की वजह से महीनों विदेशों में रहे. उनकी तो जैसे दुनिया ही बदल गई.

चेंदरू ने एक बार बातचीत में बताया था कि किस तरह विदेश में लोग उन्हें देखने आते थे और हैरान हो जाते थे कि इतना छोटा बच्चा बाघ के साथ रहता है, खाता-पीता है और उसकी पीठ पर बैठकर जंगल में घूमने की बातें करता है. चेंदरू रातों रात दुनिया भर में मशहूर हो गए.

चेंदरू को आर्ने सक्सडॉर्फ गोद लेना चाहते थे और इसके लिए उनकी पत्नी एस्ट्रीड सक्सडॉर्फ भी तैयार थीं लेकिन दोनों के बीच तलाक के बाद फिर किसी ने चेंदरू को पूछा तक नहीं. चेंदरू को बुढ़ापे में भी उम्मीद थी कि एक दिन उन्हें तलाशते हुए आर्न सक्सडॉर्फ गढ़बेंगाल गांव ज़रूर आएंगे लेकिन 4 मई 2001 को आर्ने सक्सडॉर्फ की मौत के साथ ही चेंदरू की यह उम्मीद भी टूट गई और आज बस्तर का यह टार्जन भी हमेशा-हमेशा के लिये खामोश हो गया.

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