छपरा मिड-डे मील कांड में 17 साल सजा

पटना | समाचार डेस्क: छपरा मिड-डे मील कांड में हेडमास्टर को 17 साल की सजा हुई है. छपरा के सिविल कोर्ट ने सोमवार को सजा का एलान किया है. उल्लेखनीय है कि 16 जुलाई 2013 को सारण जिले के धर्मासती गंडामन गांव के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 23 बच्चों की मौत हो गई थी तथा 25 बच्चे बीमार हो गये थे.

अदालत ने तत्कालीन हेडमास्टर मीना कुमारी को 17 साल सुनाई है. अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए लोक अभियोजक सुरेंद्रनाथ सिंह ने बताया, “कोर्ट ने मीना कुमारी को भारतीय दंड सहिता की धारा 304 और 308 के तहत दोषी पाते हुए सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने धारा 304 (2) के तहत 10 वर्ष की कठोर सज़ा सुनाई और ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही धारा 308 (2) के तहत सात साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई और ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.’’


सरकारी वकील ने बताया कि जुर्माने की रकम पीड़ित परिवारों को बांट दी जायेगी. बचाव पक्ष के वकील भोला राय ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ मीना कुमारी पटन उच्च न्यायालय में अपील करेंगी.

खबरों के मुताबिक मिड-डे मील की सब्ज़ी में ज़हरीला कीटनाशक ऑर्गेनो फॉस्फोरस मिला हुआ था. आशंका है कि जिस तेल में यह सब्ज़ी बनी, ये पदार्थ उसमें मिला हुआ था. बच्चों के शुरुआती लक्षण और उल्टी की गंध से डॉक्टरों को लगा था कि यह ऑर्गेनो फॉस्फोरस का असर हो सकता है.

उस समय खाना बनाने वाली महिला मंजू ने मीडिया को बताया था कि तेल में ज़हरीला पदार्थ था. जब उन्होंने कड़ाही में तेल डाला तो तेल का रंग काला हो गया और तेज़ गंध आई. उन्हें शक हुआ लेकिन फिर भी उन्होंने सब्ज़ी बना दी. मंजू ने बताया था कि वह तेल उसे मीना कुमारी ने ही दिया था.

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