नसबंदी से 13 महिलाओं की मौत

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में नसबंदी के बाद 13 महिलाओं की मौत हो गई और 32 की हालत गंभीर बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने चार-चार लाख रुपये मुआवजा का ऐलान किया. लापरवाही के आरोप में तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है. बिलासपुर से 10 किलोमीटर दूर पेंडारी गांव के नेमिचंद अस्पताल में लगे नसबंदी शिविर में शनिवार को 83 महिलाओं की नसबंदी की गई थी. शिविर में जिला अस्पताल के डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. के.के. ध्रुव व डॉ. एम. निखटा ने लेप्रोस्कोपी पद्धति से ऑपरेशन किया और चंद घंटे बाद सभी महिलाओं को छुट्टी दे दी. महिलाएं अपने-अपने घरों तक पहुंची तो एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी.

रविवार को उन्हें उल्टियां आने लगीं. हालत बिगड़ती देख उन्होंने स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों से संपर्क किया. सोमवार को इन महिलाओं की हालत और बिगड़ गई. सुबह से जिला अस्पताल और सिम्स में पीड़ित महिलाओं के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह देर रात तक जारी रहा. सोमवार को एक महिला की मौत तो उस समय हुई, जब जिला कलेक्टर अस्पताल में आकर पीड़ितों का हालचाल जान रहे थे.


सोमवार को सबसे पहले दो महिलाओं की मौत हुई, रात होते-होते और दो की मौत हो गई. इसके बाद आंकड़ा बढ़ता गया. मंगलवार सुबह तक मरने वाली महिलाओं की संख्या आठ हो गई.

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो में अभी भी 56 महिलाएं भर्ती हैं. इनमें से 32 की हालत गंभीर बताई जा रही है.

बिलासपुर जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आर.के. शुक्ला ने कहा, “मृत दो महिलाओं के शवों का पोस्टमार्टम मैंने किया है. उनकी मौत शॉक से हुई है. लगातार उल्टी व घबराहट के चलते ऐसा हुआ होगा.”

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मंगलवार सुबह बिलासपुर के सिम्स अस्पताल पहुंचे. उन्होंने डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक की.

मुख्यमंत्री ने मृत महिलाओं के परिवार को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने और गंभीर रूप से बीमार महिलाओं को 50 हजार रुपये बतौर सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को तत्काल बिलासपुर के लिए रवाना किया.

इससे पहले, सोमवार देर रात स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल सिम्स में पीड़ितों को देखने पहुंचे तो वहां लोगों ने जोरदार हंगामा किया. स्वास्थ्य मंत्री ने नसबंदी ऑपरेशन करने वाले डॉ. आर.के. गुप्ता सहित तीन डॉक्टरों को निलंबित करने का आदेश दिया. डॉ. गुप्ता को इसी वर्ष 26 जनवरी को 50 हजार ऑपरेशन का लक्ष्य पूरा करने पर पुरस्कृत किया गया था.

घटना के बाद पूरे प्रदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है. बिलासपुर अस्पताल में मृत महिलाओं के परिजनों सहित कांग्रेस कार्यकर्ता राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा, “जांच कमेटी का मतलब होता है कार्रवाई को टालना, स्वास्थ्य मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए. दोषियों पर हत्या का जुर्म दर्ज होना चाहिए.”

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा, “प्रदेश में यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी सरकारी शिविरों में लोगों के अंग भंग और मौत के मामले सामने आ चुके हैं. घटना के बाद सरकार का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील है.”

इससे पहले भी यहां के एक सरकारी शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दर्जनों लोगों की आंखें चली गई थीं.

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