अडानी के पावर प्लांट का विरोध

अंबिकापुर | संवादादाता: छत्तीसगढ़ में अडानी रिजेक्ट कोयले से पावर प्लांट चलायेगा. इस रिजेक्ट कोयले के कारण 57 फीसदी तक राख का उत्सर्जन होगा. इसकी जनसुनवाई 30 दिसंबर को की जायेगी, जिसका हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन ने विरोध किया है.

सरगुजा के उदयपुर इलाके में अडानी उद्योग से संबद्ध सरगुजा पॉवर प्राइवेट लिमिटेड के 540/600 मेगावाट पावर प्लांट को शुरु करने की योजना है. आरोप है कि राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को 21 दिसंबर 2011 को 10 मिलियन टन प्रतिवर्ष हेतु पर्यावरण स्वीकृति जारी की गई है, जिसमें 2.24 मिलियन टन प्रति वर्ष रिजेक्ट कोयला के प्रयोग हेतु 135 मेगावाट का प्रस्तावित विद्युत संयंत्र की स्वीकृति निहित है. परंतु सितंबर 2014 में प्रस्तुत यह पर्यावरण प्रभाव आंकलन रिपोर्ट में 540/600 मेगावाट के आधार पर बनाई गई गई है, जिसमें क्षमता वृद्धि का कोई कारण या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.


यहां तक कि 4 मार्च 2013 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा परसा इस्ट केते बासेन परियोजना को बैरल वाशिंग टेक्नालॉजी आधारित 2 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले इंटेरिम वाशरी हेतु पर्यावरणीय स्वीकृति जारी हुई थी, जिसमें प्रस्तावित ताप विद्युत संयंत्र की क्षमका वृद्धि का कोई उल्लेख नहीं है.

इस पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति की विशेष शर्त 21 दिसंबर 2011 को यह साफ किया गया है कि पावर प्लांट के लिये ग्रामीणों से परामर्श कर के स्थल का चयन करके टर्म्स ऑफ रेफरेंस के लिये कंपनी आवेदन पेश करेगी. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं पता.

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