आदिवासियों से बलात्कार में छत्तीसगढ़ आगे

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में हर दिन चार आदिवासी अत्याचार के शिकार होते हैं. आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचार में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे नंबर पर है और आदिवासियों के खिलाफ अपराध की दर छत्तीसगढ़ में 19.4 है. राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 10.5 है. 2015 के यह आंकड़े एनसीआरबी की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आये हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार आदिवासियों के खिलाफ बलात्कार के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे नंबर पर है, जबकि पहले नंबर पर पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश है.

2015 में देश भर में अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार के कुल 10,914 मामले दर्ज किये गये हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ में दर्ज़ होने वाले मामलों की संख्या 1518 है. यानी हर दिन छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के खिलाफ 4.15 मामला दर्ज होता है.

लेकिन अपराध और कानून के जानकारों का कहना है कि ये वो आंकड़े हैं, जो थाने और कोर्ट-कचहरियों तक पहुंच पाते हैं. लेकिन पांच गुणा से कहीं अधिक मामले दूर गांव और जंगलों में ही दफन हो कर रह जाते हैं. कई बार तो प्रभावशाली लोगों की पहुंच और ताकत के कारण शहरी क्षेत्रों में भी आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराध कहीं रिकार्ड में दर्ज ही नहीं होते.

भारत में 2015 में आदिवासियों के खिलाफ दर्ज 10914 मामलों में से राजस्थान में 3,207, मध्य प्रदेश में 1,531, छत्तीसगढ़ में 1,518, ओडीशा में 1,307, आंध्र प्रदेश में 719, तेलंगाना में 698, महाराष्ट्र में 483, गुजरात में 256 और झारखण्ड में 269 दर्ज हुये.

आदिवासियों पर बलात्कार के मामले में छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है. 2015 में आदिवासियों पर बलात्कार के 952 मामले दर्ज किये गये, जिनमें मध्य प्रदेश में 359, छत्तीसगढ़ में 138, महाराष्ट्र में 99, ओडिशा में 94, राजस्थान में 80, केरल में 47, तेलंगाना और गुजरात में 44, तथा आन्ध्र प्रदेश में 21 बलात्कार के मामले शामिल हैं.

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