छत्तीसगढ़ नक्सली हिंसा का गढ़

नई दिल्ली | संवाददाता: छत्तीसगढ़ को नक्सली हिंसा का सिरमौर राज्य कहा जाये तो गलत न होगा. केन्द्र सरकार ने स्वीकार किया है कि 2015 में देश में नक्सली हिंसा में सबसे ज्यादा मौतें छत्तीसगढ़ में हुई हैं. 15 अप्रैल 2015 तक देश भर में नक्सली हिंसा से 79 मौते हुई हैं जिसमें से छत्तीसगढ़ में 46 मौतें हुई हैं. इन हिंसाओं में 18 नागरिक तथा 28 सुरक्षा बलों के जवान मारे गये हैं. आकड़े स्वंय केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा पेश किये गयें हैं.

इसी तरह से इस साल 15 अप्रैल 2015 तक देश भर में नक्सली हिंसा के 357 वारदाते हुई हैं जिसमें से 188 छत्तीसगढ़ में हुई है. इस प्रकार, छत्तीसगढ़ का हिस्सा कुल वारदातों में 52.2 फीसदी तथा कुल मौतों में 58.2 फीसदी है. जाहिर है देश भर में होने वाले नक्सली हिंसा के वारदातों में से आधी छत्तीसगढ़ में होती है तथा मौते 60 फीसदी छत्तीसगढ़ में होती हैं.


उल्लेखनीय है कि साल की शुरुआत में फऱवरी माह में गांव हलबरस, थाना बांदे जिला-कांकेर में सीपीआई माओवादी और सुरक्षा बलों के बीच हुए एक मुठभेड़ में 2 पुलिस कर्मी, 8 सुरक्षा बल के जवान और 2 ग्रामीण घायल हो गए.

11 अप्रैल, 2015 को गांव पिडमेल, थाना चिंतागुका सीपीआई माओवादी द्वारा घात लगाकार किए गए हमले में 7 एसटीएफ जवान मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए. माओवादी, एसटीएफ जवानों से 1 यूबीजीएल फिटेड एके-47, 1 एलएमजी, 1 वीएचएपनफ सेट और 01 51एमएम का मोर्टार शेल ले जाने में सफल हो गए.

दिनांक 12.04.2015 को लगभग 10-11 बजे जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ में बरबसपुर माइंस में माओवादियों द्वारा जायसवाल नीको उद्योग के 18 लौह अयस्क माइनिंग में प्रयुक्त वाहनों को आग के हवाले कर दिया.

दिनांक 12/13.04.2015 के बीच की मध्य रात्रि में माओवादियों ने जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ में चोटबेटिया में स्थिति नव स्थापित बीएसएफ कैंप के सुरक्षा गश्ती दल पर लगभग रात के 11 बजे हमला कर दिया. माओवादी छोटबेटिया-संगम रोड पर 400 मीटर की दूरी पर स्थित एक घर में छिपे हुए थे. माओवादियों ने गश्ती दल पर गोलीबारी की जिसमें 1 हेड कांस्टेबल घायल हो गया. बाद में उपचार के दौरान उस हेड कांस्टेबल की मौत हो गई. घटनास्थल की तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने वहां से 1 अज्ञात माओवादी का शव बरामद किया और उन्हें एक जोड़ा हुआ आईईडी नजर आया जिसे बीडीएस दस्ता की मदद से डीफ्यूज कर दिया गया.

दिनांक 13 अप्रैल, 2015 को गांव खुटिआपारा, थाना किरनदुल, जिला-दांतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ के निकट किरनदुल-पलनार रोड पर सीपीआई माओवादी काडरों द्वारा राज्य पुलिस के एंटी-लैंड माइन वाहन को निशाना बनाकर किए गए बारुदी सुंरग के एक विस्फोट में 5 सीएएफ जवान मारे गए और 7 घायल हो गए.

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