नेताजी के परिवार की जासूसी सही

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार की जासूसी के मामले को सही ठहराया है. उन्होंने कहा कि जासूसी करना गलत नहीं है, जिन लोगों ने कभी शासन नहीं चलाया है, वही इस पर सवाल उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र में आईबी और राज्य में एसआईबी का काम राष्ट्र और राज्य हित में जानकारी एकत्र करना है. इसमें जो भी आवश्यक जानकारी होती है, उसे एकत्र किया जाता है. नेताओं और बड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. अगर नेताजी की जासूसी हो रही थी तो इसका मतलब यह नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नेताजी से डरते थे.

जोगी ने कहा कि अपने लोगों के बारे में पूरी जानकारी रखना राष्ट्रहित का काम है. अमेरिका में वॉटरगेट कांड हुआ था, इसका यह मतलब नहीं है कि वहां के राष्ट्रपति अपनी जासूसी करा रहे थे.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इस मामले को लेकर बेवजह हो-हल्ला मचा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके अंतरंग मित्रों पर भी जरूर नजर रखी जा रही होगी. यह शासन-तंत्र की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. यह मुद्दा उठाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सुभाषचंद्र बोस के निधन के बारे में पहली जांच ब्रिटिश सरकार ने कराई थी. लार्ड माउंटबेटन ने आजाद हिंद फौज के एक वरिष्ठ जनरल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. आखिरी कमेटी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बनाई थी. इसमें भी मुखर्जी कमेटी ने सिर्फ इतना कहा था कि विमान हादसा नहीं हुआ था. उस कमेटी ने यह कभी नहीं कहा कि सुभाषचंद्र बोस का निधन नहीं हुआ है.

जोगी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को हर बीस साल में खुफिया जानकारी को सार्वजनिक करना चाहिए. अमेरिका में इस तरह की व्यवस्था है. वहां खुफिया जानकारियों को सार्वजनिक किया गया. जब तक खुफिया जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, तब तक सही इतिहास कैसे लिखा जाएगा?

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