स्वच्छता में पिछड़ा छत्तीसगढ़

नई दिल्ली | संवाददाता: शहरों को स्वच्छ रखने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में पिछड़ गया गया है. इसमें संतोष की बात यह है कि छत्तीसगढ़ के शहर सबसे गंदे शहरों में शामिल नहीं हैं. स्वच्छ भारत अभियान की रैंकिग में रायपुर 476 शहरों में 293 स्थान पर है. उल्लेखनीय है कि इसमें स्वच्छता का पैमाना रैंकिंग खुले में शौच व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तरीकों पर आधारित है.

उल्लेखनीय है कि जुलाई, 2014 में राज्यसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुये केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने जवाब दिया था कि छत्तीसगढ़ की 85 फीसदी आबादी खुले में शौच करती है. मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने जनगणना 2011 के आकड़ों के हवाले से बताया कि छत्तीसगढ़ की केवल 14.8 फीसदी आबादी शौचालयों का उपयोग करती हैं.


राज्यसभा में केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेंन्द्र कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया था कि इन राज्यों में बड़ी संख्या में महिलाएं तथा लड़कियां शौचालय बनाने की हैसियत न होने के कारण इसका उपयोग नहीं कर पा रही है. जाहिर है कि इस पैमाने के आधार पर छत्तीसगढ़ का स्वच्छ भारत अभियान में पिछड़ना लाजिमी था.

यह सर्वे 2014-15 के बीच शहरी विकास मंत्रालय ने करवाया है. स्वच्छ भारत रैंकिंग 42 अंक पर आधारित थी. इसमें 20 अंक खुले में शौच और 22 अंक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संकेतक पर आधरित थे. इसके अलावा वेस्ट वाटर ट्रिटमेंट, पीने के पानी की गुणवत्ता, नदियों के सतह पर पानी की गुणवत्ता, पानी के कारण होने वाली बीमारियों की वजह से मृत्य की दरें शामिल थीं.

राष्ट्रीय स्वच्छता नीति 2008 के तहत यह सर्वेक्षण साल 2014-15 के दौरान किया गया, जिसे मंत्रालय ने शुरू किया था.

बयान के मुताबिक, “देश के 476 शहरों में किए गए सर्वेक्षण में कर्नाटक के मैसूर शहर ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है और इसी राज्य के तीन और शहर शीर्ष 10 में हैं. शीर्ष 100 में पश्चिम बंगाल के 25 शहरों/कस्बों को जगह मिली है.”

रैंकिंग के मुताबिक, 27 राजधानियों में 15 शीर्ष 100 में रहे, जबकि पांच का स्थान 300 से भी नीचे है. राजधानियों में बेंगलुरू का सातवां स्थान है, जबकि पटना सबसे नीचे 429वें स्थान पर है.

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले 100 शहरों में उत्तरी राज्यों के 74, पूर्वी राज्यों के 21, पश्चिमी राज्यों के तीन तथा दक्षिणी राज्यों के 2 शहर शामिल हैं.

दामोह (मध्य प्रदेश) सबसे निचले पायदान (476) पर रहा, जिसके बाद भिंड (मध्य प्रदेश), पलवल एवं भिवानी (हरियाणा), चित्तौड़गढ़ (राजस्थान), बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश), नीमच (मध्य प्रदेश), रेवाड़ी (हरियाणा), हिंदौन (राजस्थान) तथा संबलपुर (उड़ीसा) हैं.

स्वच्छ भारत अभियान का क्रियान्वयन शहरी इलाकों में किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य खुले में शौच की समस्या के उन्मूलन के लिए शौचालय का निर्माण व घर-घर जाकर ठोस कचरे का संग्रह तथा निपटान है. एक लाख की आबादी वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के सभी 476 प्रथम श्रेणी के शहरों में स्वच्छता के आधार पर रैंकिंग को अंजाम दिया गया है.

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