छत्तीसगढ़ में भी उठी आरक्षण की मांग

रायपुर | संवाददाता: कांकेर में सोमवार को तीस हजार बंग समुदाय के लोगों ने आरक्षण की मांग की है. छत्तीसगढ़ के बस्तर के कांकेर के परलकोट के बंग समुदाय ने नमो शुद्र, पौंड, क्षत्रिय और राजवंशी तबकों को आरक्षण देने की मांग पर बड़ी सभा की. बंग समुदाय के पिछड़ों के लिये आरक्षण की मांग करने वालों का कथन है कि इन इन वर्गों को असम, त्रिपुरा, मेघालय, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, अंडमान निकोबार और अरुणाचल प्रदेश में एससी वर्ग में रखा गया है इसीलिये छत्तीसगढ़ में भी उन्हें एससी वर्ग में शामिल किया जाये.

आंदोलनकारियों का कहना है कि इऩ वर्गो को आरक्षण देने के लिये उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और कर्नाटक सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव दे दिया है.


इस आंदोलन में रोज लोग जुड़ते जा रहें हैं. बताया जा रहा है कि इसे छत्तीसगढञ के एक सांसद का भी समर्थन प्राप्त है. सोमवार के प्रदर्शन में शामिल होने के लिये ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी समाज के नेता यहां पहुंचे.

जाहिर है कि गुजरात के पटेल आंदोलन की हवा छत्तीसगढ़ के बस्तर तक पहुंच गई है. आंदोलनकारियों की मांग है कि शरणार्थी के रूप में मिली सरकारी जमीन का मालिकाना हक. तीसरी भाषा के रूप में हो बंगला भाषा की पढ़ाई हो. शिक्षा की योजनाओं के तहत पहली से 12वीं तक बांग्ला भाषा की किताबें सभी स्कूलों में मुफ्त दी जाएं तथा पखांजुर को अलग जिला बनाया जाये.

उल्लेखनीय है कि भारत के बंटवारे के बाद पूर्वी पाकिस्तान से कई हिन्दू बंगाली परिवार विस्थापित होकर भारत आ गये थे. उस समय भारत सरकार ने उन विस्थापितों को देश के अलग-अलग राज्यों में बसाया था जिनमें से बस्तर का यह इलाका भी शामिल है. निखिल भारत बंगाली उद्बस्तु समन्वय समिति के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष असीम रॉय का कहना है कि अन्य राज्यों में बसे बंगालियों को संविधान के तहत सुविधाएं दी गईं, लेकिन छत्तीसगढ़ में विस्थापित बंगालियों को अब तक मौलिक अधिकारों से भी दूर रखा गया है.

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