दंतेवाडा़ में क्षीरसागर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किसानों और पशुपालकों ने डेयरी व्यवसाय के लिए ‘क्षीरसागर’ परियोजना की शुरूआत कर दी है. किसानों की इस समिति का पंजीयन ‘क्षीरसागर दूध उत्पादक सहकारी समिति’ के नाम से किया जा चुका है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में शुरु की गई इस परियोजना के माध्यम से दक्षिण बस्तर में दूध और उस पर आधारित खाद्य सामग्री का उत्पादन बढ़ेगा. इनके इस्तेमाल से लोगों की और विशेष रूप से बच्चों की सेहत में भी काफी सुधार आएगा. मुख्यमंत्री रमन सिंह की विशेष पहल पर यह परियोजना गुजरात के विश्व प्रसिद्ध ‘अमूल’ डेयरी की शैली में शुरू की गई है. कलेक्टर के अनुसार इस परियोजना से दंतेवाड़ा जिले में डेयरी उद्योग की राहें खुल गई हैं.

इस परियोजना के तहत आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित पाश्चराइजेशन यूनिट की स्थापना की गई है. इसमें प्रतिदिन दो हजार लीटर दूध का उत्पादन और वितरण होगा. किसानों की समिति को इस कारोबार में हर महीने लगभग 32 लाख रूपए की आमदनी होने का अनुमान लगाया गया है. इस समिति से जुड़े दूध उत्पादक किसानों के समूहों को हर महीने लगभग 1 लाख 25 हजार रूपए की आमदनी होने की संभावना है. संयंत्र में तैयार पाश्चूरीकृत दूध का वितरण पैकेटों में किया जाएगा.

इस महीने की पन्द्रह तारीख को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दंतेवाड़ा में दूध के उत्पादन और व्यवसाय के लिए सहकारिता पर आधारित ‘क्षीरसागर’ परियोजना ने विधिवत कार्य शुरू कर दिया. छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर परियोजना का लोकार्पण किया.

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