चौबे परिवार 40 साल बाद हारा

बेमेतरा | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में सबसे अप्रत्याशित हार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे की हुई है. इलाके की जनता ने 40 साल बाद चौबे परिवार के किसी सदस्य पर विश्वास न जताकर उन्हें राजनीतिक सजा दी है. सूबे में साजा निर्वाचन क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है. इस सीट पर चौबे परिवार का 40 साल तक कब्जा रहा है. 1985 से अब तक लगातार छठी पारी पूरी करने वाले चौबे को सातवीं पारी में हार का सामना करना पड़ा.

भाजपा के लाभचंद बाफना ने वर्ष 2008 में पहली बार साजा विधानसभा क्षत्र में रवींद्र चौबे के विरुद्ध चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें 5,000 मतों से हार का सामना करना पड़ा. भाजपा ने इस साल दूसरी बार बाफना को चौबे के विरुद्ध मैदान में उतारा.


लाभचंद ने 2008 का चुनाव हारने के बाद क्षेत्र से नदारद न होकर पूरे पांच साल तक लगातार क्षेत्र के लोगों से संपर्क में रहे. उनके प्रत्येक छोटे-बड़े कार्यो में वह शरीक हुए. बाफना ने चौबे को 9620 वोट से हराकर पिछली बार की हार का बदला लिया.

खास बात यह है कि साजा में हमेशा कांग्रेस जीतती रही है और एक ही परिवार का व्यक्ति हमेशा से विधायक रहा है. साजा में वर्ष 1972 में रवींद्र चौबे के पिता स्व. देवी प्रसाद चौबे, 1977 में बड़े भाई प्रदीप चौबे, 1980 में मां स्व. कुमारी देवी चौबे और 1985 से अब तक लगातार छठी पारी पूरी कर रवींद्र चौबे सातवीं पारी के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे.

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