नौ माह बाद सुलझी कत्ल की गुत्थी

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नौ माह पहले हुई हत्या की गुत्थी के सुलझा लिया गया है. इसके लिये पुलिस ने लाश का डीएनए टेस्ट करवाया. जब नौ माह के बाद डीएनए की रिपोर्ट मिली जब जाकर हत्या किसकी हुई इसका पता चल सका.

मस्तूरी के रिसदा जाने वाले मार्ग में पिछले साल 9 अक्टूबर को एक युवक की सड़ी-गड़ी लाश मिली थी. लाश को बोरे में भरकर ठिकाने लगाया गया था. उस समय लाश की शिनाख्त न हो सकी थी.


उसी समय वहां के खोरसी गांव के कलाराम कुर्रे ने पुलिस को सूचना दी कि उनका 38 वर्षीय पुत्र किशन कुर्रे घर से गायब है. पुलिस ने किशन की पत्नी जागृति कुर्रे से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह मजदूरी करने बाहर गया हुआ है.

पुलिस को किशन की पत्नी जागृति कुर्रे के बयान पर शक हुआ तथा उन्होंने लाश की हड्डी तथा किशन के बेटे व पिता के खून का सैंपल डीएमए की जांच के लिये हैदराबाद की लैब में भेज दिया.

जब नौ माह के बाद डीएनए की रिपोर्ट आई तो पता चला कि वह लाश किशन की थी. इसके बाद पुलिस ने किशन की पत्नी जागृति कुर्रे से कड़ाई से पूछताछ की तो मामलें की गुत्थी सुलझ गई.

जागृति कुर्रे ने बताया कि उसका अपने जेठ के साथ अवैध संबंध था. जिसकी जानकारी एक दिन उसके पति किशन को लग गई. किशन ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था.

इसी के चलते जागृति कुर्रे ने अपने जेठ के साथ मिलकर अपने पति की हत्या कर दी तथा लाश को बोरे में भरकर फेंक दिया गया था.

दरअसल, किशन कुर्रे ने अपनी पहली पत्नी की मौत के बाद दो बच्चों की मां जागृति से शादी की थी. किशन के घर के पास ही रहने वाले उसके भाई कमलेश कुर्रे से उसकी पत्नी का बाद में अवैध संबंध बन गया था. एक दिन किशन ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. उससे उनके बीच झगड़ा भी हुआ था.

उसी के बाद से दोनों किशन को रास्ते से हटाने की फिराक में थे. 23 सितंबर 2015 को जब किशन शराब पीकर घर आया तो जागृति ने डंडे से उसके सिर पर वार कर दिया. उस समय किशन सो रहा था. उसके बाद कमलेश कुर्रे ने आकर टंगिया से उसके गर्दन पर वार किया. जिससे किशन की मौत हो गई. दोनों ने लाश को उठाकर बोरे में भरकर फेंक दिया था.

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