पुलिस थ्योरी से सहमत नहीं परिवार

बिलासपुर | संवाददाता: गौरांग बोबड़े का परिवार मौत की पुलिस थ्योरी को मानने को तैयार नहीं है. मृतक गौरांग की बहन वेदांती का कहना है कि उसके भाई की हत्या की गई है. यदि गौरांग की हत्या नहीं हुई है तो उसके शरीर में इतनी चोटें कहां से आ गई? वेदांती का सवाल है कि गिरने से आंखों में चोट नही लग सकती. फिर उसे दोस्त उसे छोड़कर क्यों भाग गये?

मृतक गौरांग के परिवार का आरोप है कि रईसजादों को बचाने के लिये हत्या के मामले को गैर-इरादतन हत्या का मामला बना दिया गया है. वेदांती का कहना है कि केस कमजोर होने के कारण सभी कुछ दिनों में छूट जायेंगे.


उल्लेखनीय है कि चार दिनों पूर्व बिलासपुर के रामा मैग्नेटो मॉल के बेसमेंट में गौरांग की खून से लथपथ लाश मिली थी. पुलिस ने मंगलवार को दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि सीढ़ियों से उतरते समय गौरांग के साथ खींचतान हुई थी जिससे वह सीढ़ियों से गिर गया तथा उसकी मौत हो गई. हादसे के बाद उसके दोस्त उसे छोड़कर चले गये.

बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक मयंक श्रीवास्तव के अनुसार गौरंग को सीढिय़ों से नीचे गिराया गया था. यह काम उसके ही दोस्त अंकित ने किया था. पुलिस अधीक्षक के अनुसार माल में लगे एक 102 कैमरे में एक कैमरे के फुटेज में यह बात साफ तौर पर नजर आ रही है. उसी को आधार मानकर उसके चारों दोस्तों को धारा 304 भाग-2,120बी, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया गया है.

पुलिस ने साक्ष्य छुपाने तथा गैर-इरादतन हत्या के अपराध में गौरांग के चार दोस्त किशुक अग्रवाल, करण जायसवाल, करण खुशलानी तथा अंकित मल्होत्रा को गिरफ्तार कर लिया है.

वहीं, बिलासपुर के सीनियर एडव्होकेट विश्वास ओत्तलवार का कहना है कि पुलिस इस प्रकरण में अदालत के समान काम करती दिखाई दे रही है. वह बिना विवेचना तथा अन्वेषण पूरा किये ही इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि हत्या का अपराध नहीं हुआ है.

बिलासपुर के दूसरे वरिष्ठ वकील आशीष शुक्ला का कहना है कि परिस्थितियों को देखते हुये प्रथम दृष्टया धारा 302 का मामला नजर आता है. मृतक के नाजुक अंगों पर सांघातिक चोटे आई हैं. प्रकरण में पहले हत्या का अपराध दर्ज किया जाता तथा इसे न्यायालय के विवेक पर छोड़ना था. यदि आवश्यक होता तो वह इसे धारा 304 में तब्दील करती.

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