बिलासपुर: तोरवा चिमनी जमीनदोज

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के 80 साल पुराने तोरवा पॉवर हाउस चिमनी तो ढहा दिया गया है. शनिवार दोपहर को रायपुर से आई टीम ने तीन ब्लॉस्ट करके इस चिमनी को जमीनदोज कर दिया. रविवार को मलबा हटाने का काम किया जायेगा.

बिलासपुर शहर में पहली बार साल 1935 में अंग्रेजों के जमाने में पहली बार बिजली का उत्पादन शुरु किया गया था. जिसको कटनी के रहने वाले लाला अमरनाथ ने तोरवा में बनवाया था. बिजली का उत्पादन टर्बो जनरेटर से किया जाता था. जिसमें कोयले तथा पानी का उपयोग किया जाता था. धुआं निकलने के लिये इस 60 फीट उंची चिमनी का निर्माण कराया गया था.


सेंट्रल इंडिया इलेक्ट्रिक कंपनी द्वारा इस टर्बों जनरेटर से बने बिजली को तोरवा से लेकर बिलासपुर के कलेक्ट्रेट तक सप्लाई किया जाता था. 1 नवंबर 1956 को इस पॉवर हाउस को एमपीईबी ने हस्तगत कर लिया था. उस समय इसके उपभोक्ताओं की संख्या 3270 थी.

जब से कोरबा के संयंत्र से बिजली आने लगी तब से इस तोरवा पॉवर हाउस को बंद कर दिया गया.

बिलासपुर के इतिहास में इस तोरवा पॉवर हाउस का विशेष महत्व है. इस इलाके को आज भी तोरवा पॉवर हाउस कहा जाता है. शायद चिमनी के ढ़ह जाने के बाद भी इसे इसी नाम से पुकारा जाता रहेगा.

जब बिलासपुर शहर में उंची-उंची इमारते नहीं बनी थी तब इस चिमनी को दूर से देखा जा सकता था. चिमनी लाल ईंटों से बनी थी.

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