छत्तीसगढ़ में डरी हुई है भाजपा?

मृगेंद्र पांडेय |फेसबुक : भाजपा को चुनाव में हार का डर सता रहा तो अपने पुराने कार्यालय एकात्म परिसर लौट आई. दिन भी चुना सावन सोमवार का पहला दिन. मुख्यमंत्री कार्यालय में पूजा करेंगे तो प्रदेश अध्यक्ष बाबा धाम में जल चढ़ाएं.

यह महज सयोग हो तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन भाजपा के सूत्रों की माने यह पूरी प्लानिंग से किया जा रहा है. तंत्र-मंत्र, धर्म कर्म, पूजा पाठ का सहारा लेकर भाजपा सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है.


हालांकि कुछ बड़े नेता इससे इनकार करते हैं, लेकिन जो दिख रहा है, वह यह है कि भाजपा को जनता के प्यार की जगह बाबाओं के मंत्र पर ज्यादा भरोसा हो गया है.

मंत्री रामसेवक पैकरा कंबल बाबा को लेकर पूरे सरगुजा में घूम रहे हैं तो विधानसभा में 10 किलो की माला पहने एक बाबा सिर्फ इसलिए आए थे कि उन्हें सत्ता में चौथी बार डॉक्टर रमन को CM बनाना है.

प्रेम प्रकाश पांडे हर साल बाबा धाम जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ खास अंदाज में गए. मंत्री राजेश मूणत और अजय चंद्राकर का पूजा प्रेम किसी से छुपा नहीं है.

तो क्या सरकार उस दौर में आ गई है जहां जनता की समझ, अपने विकास कार्यों की जगह पूजा पाठ का सहारा लेना पड़ रहा है. अगर भाजपा सरकार ने पिछले 15 साल में विकास किया है तो उसे ढोंग ढकोसलों की क्या जरूरत पड़ रही है.

चुनाव में मुद्दा विकास होता है, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि किसी भी प्रदेश में विकास चुनाव के आखिरी 3 दिन में गायब हो जाता है और सामाजिक समीकरण, मनी पावर और मसल पावर प्रभावी हो जाती है.

नेता और राजनीतिक दल भी उसी 3 दिन का इंतजार करते हैं और उस 3 दिन के एजेंडे को तैयार करने के लिए 5 साल तक उधेड़बुन में लगे रहते हैं.

अब समय है वोटर को जागरुक होने का, आखिरी 3 दिन में बदलने वाले चुनावी गणित को समझते हुए सच्चे और अच्छे आदमी को वोट देने का है.

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