छत्तीसगढ़: हिरणों की मौत कैसे?

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के रायपुर के नंदनवन में 10 काले हिरणों की मौत का कारण जानने में बाहर से आये विशेषज्ञ भी नाकाम रहें हैं. अब इन काले हिरमों के खून के को चूहों में इंजेक्ट किया गया है. चूहों की जांच के बाद ही काले हिरणों की मौत का कारण जाना जा सकेगा. छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे नंदनवन जू में लगातार 10 काले हिरणों की मौत होने की घटाना की जांच के लिए रायपुर पहुंची बरेली के विशेषज्ञों की टीम ब्लड सैंपल लेकर लौट गई. टीम हिरणों की मौत के वास्तविक कारण नहीं पता पाई.

बताया जा रहा है कि बिसरा व अन्य नमूनों की जांच पड़ताल के बाद ही बीमारी का पता लगाया जा सकेगा. काले हिरणों की मौत किस कारणों से हुई, इसकी रिपोर्ट हफ्तेभर बाद आएगी. वहीं वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चिकित्सक डॉ. पराग निगम भी शनिवार शाम दिल्ली से रायपुर पहुंचे. उन्होंने भी नंदनवन का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने नंदनवन प्रबंधन को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए.

इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम के विशेषज्ञों ने पोस्टमार्टम कराया था, लेकिन मौत की वास्तविक और ठोस वजह सामने नहीं आ सकी. टीम में डॉ. पी.एम. बैनर्जी, डॉ. किरण, डॉ. महेंद्रन और डॉ. सबरीनाथ शामिल थे.

वहीं, आईवीआरआई के वन्यजीव विशेषज्ञ ए.के. शर्मा का कहना था कि फिलहाल बीमारी का पता नहीं चला है. नंदनवन से सैंपल ले जा रहे हैं. इसकी लैब में जांच की जाएगी. जांच रिपोर्ट हफ्तेभर के भीतर आने की संभावना है.

उनका कहना था कि टीम कुछ चूहे लेकर आई थी. बीमार काले हिरणों के ब्लड को इन चूहों पर प्रवेश कराया गया है. चूहों पर बीमारी को लेकर जानकारी जुटाई जाएगी, इसके बाद ही अंतिम फैसले पर पहुंचा जा सकेगा.

शर्मा का कहना है कि अज्ञात बीमारी का असर सीधे हिरणों के मस्तिष्क पर पड़ रहा है.

नंदनवन के पशु चिकित्सक डॉ. जयकिशोर जाड़िया का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार ही इलाज की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि बरेली से आई टीम लौट चुकी है.

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