यूपी, छत्तीसगढ़ी बंधुवाओं का गढ़ बना

आजमगढ़ | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के 13 बंधुवा मजदूरों को यूपी के आजमगढ़ से 30 दिसंबर को मु्क्त कराया गया. उल्लेखनीय है कि इसी माह के शुरु में यूपी के भदोही से छत्तीसगढ़ के 20 बंधुवा मजदूरों को मुक्त कराया गया था. बंधुआ मुक्ति मोर्चा के कार्यवाहक निदेशक निर्मल गोराना का कहना है की छत्तीसगढ़ से हज़ारो लाखों मजदूरों का माइग्रेशन हो रहा है किन्तु छत्तीसगढ़ सरकार के पास इसका कोई कारगर उपाय नहीं है. इंटर स्टेट मिग्रेंट वर्क मेंस एक्ट, 1979 की कही कोई पालना नहीं हो रही है. देश के कई राज्यों में छत्तीसगढ़ के मजदूर बंधुआ है उनकी आजादी की कोई योजना नहीं है. जम्मू में ढेरों छत्तीसगढ़िया बंधुआ मजदूर अपना नारकीय जीवन भोग रहे है और सरकार की कान पे जू तक नहीं रेंगती.

30 दिसंबर को ‘रोज़ा’ संगठन एवं आजमगढ़ प्रशासन के सहयोग से थाना क्षेत्र गम्भीरपुर, तहसील लालगंज, जिला आजमगढ़, यूपी से 13 छत्तीसगढ़िया बंधुआ मजदूर और उनके बच्चे मुक्त कराये गए. बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने पीडितो को मुक्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तथा अपराधियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी आजमगढ़ और पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को पत्र लिखा तथा फ़ोन पर संपर्क किया. इसके अलावा छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के जिलाधिकारी से की पुनर्वास की गुहार की.


मामला यह था की जिला जांजगीर-चांपा निवासी 13 छत्तीसगढ़िया बंधुआ मजदूर अपने कुल 13 नन्हे नन्हे बच्चों के साथ विगत 4 माह से गाँव धोतर, थाना -गम्भीरपुर, तहसील लालगंज, जिला आजमगढ़, यूपी में मालिक राजेश कुमार के ईंट भट्टे पर बंधुआ मजदूरी कर रहे थे. छत्तीसगढ़ के ही किसी एजेंट ने इन 13 मजदूरो को धोके से आजमगढ़ पहुचाया और मानव तस्करी का शिकार बना डाला.

मानव तस्करी से पीड़ित तमाम छत्तीसगढ़िया बंधुआ मजदूर अपने बच्चो सहित राजेश कुमार के ईंट भट्टे पर बेगार कर रहे थे. मालिक केवल रोटी के टुकड़े देकर मजदूरो से काम ले रहा था. पुष्पराज पिता राज कुमार नामक 3 वर्षीय बालक को पिता के बंधुआ होने का परिणाम झेलना पड़ा. राजेश और उसके मुनीम ने मिलकर राज के साथ मारपीट की जिसका शिकार पुष्पराज नामक बालक हो गया. महिला मजदूरो को मालिक और उसके गुंडों का अत्याचार तक सहना पड़ा. महिलाओ के साथ छेड़छाड़ और बत्तमीजी आम बात सी बन गई.

‘रोज़ा’ संगठन के मुस्ताक भाई और वसिम रजा की टीम ने 26 दिसम्बर, 2014 को आजमगढ़ जिलाधिकारी को लिखित में शिकायत दी. 30 दिसम्बर, 2014 को आजमगढ़ प्रशाशन ने 13 बंधुआ मजदूरो को मुक्ति प्रमाण पत्र देकर छत्तीसगढ़ सरकार को सुपुर्द किया.

30 दिसम्बर, 2014 की सुबह में ही छत्तीसगढ़ से इंस्पेक्टर एलएस मरकान, सहायक उपनिरीक्षक आरके सिंह, हेड कांस्टेबल सुधीर साहू आजमगढ़ पहुंचे और आज शाम को ही छत्तीसगढ़ की टीम मुक्त मजदूरो को लेकर आजमगढ़ से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुई.

मुक्त बंधुआ मजदूरो के नाम :
1. धन्नर पिता छात्राम
2. अजय पिता विसुन
3. राज पिता सन्तु
4. लाला पिता चन्दन तथा अन्य.

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