जांजगीर के 32 बंधुआ झारखंड से मुक्त

रायपुर | विशेष संवाददाता: झारखंड के हजारीबाग में जांजगीर के 32 बंधुआ मजदूर अपनी मुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ सरकार की राह देख रहे हैं. हजारीबाग जिला प्रशासन का कहना है कि इन मजदूरों के मुद्दे पर जांजगीर-चांपा के कलेक्टर आरपीएस त्यागी से बात हुई है और पुलिस का एक बल जल्दी ही हजारीबाग आएगा.

गौरतलब है कि झारखंड के हजारीबाग में 11 बच्चों समेत 32 बंधुआ मजदूरों को जरबा पंचायत के डुमागढ़ा गांव से गुरुवार को मुक्त कराया गया है. जांजगीर-चांपा के ये मजदूर जेएमके ईंट भट्ठा में बंधक बना कर रखे गये थे. इन मजदूरों को ना तो मजदूरी दी जा रही थी और ना ही इन्हें अपने घर लौटने दिया जा रहा था.


‘छत्तीसगढ़ खबर’ के झारखंड ब्यूरो के अनुसार मजदूरों के बंधक बना कर रखने की खबर एक सामाजिक संगठन ने हजारीबाग प्रेस क्लब के सदस्यों को दी, जिसके बाद पत्रकारों ने हस्तक्षेप करते हुये जिला प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई का अनुरोध किया.

जिला प्रशासन ने प्रशिक्षु आईएएस राहुल कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया और उन्हें डुमागढ़ा गांव में छापामारी के निर्देश दिये. सदर एसडीओ राजीव रंजन के अनुसार जब जिला प्रशासन की टीम गांव में पहुंची तो ईंट भट्ठा मालिकों में हड़कंप मच गया और वे सभी भाग खड़े हुये. इसके बाद प्रशासन ने 32 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया.

हजारीबाग के कलेक्टर डॉ. मनीष रंजन ने कहा है कि इस मामले में फरार भट्ठा मालिकों की गिरफ्तारी के लिये छापामारी की जा रही है. उन्होंने कहा कि पूरे जिले में इस तरह के मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं.

मुक्त कराये गये बंधुआ मजदूरों ने शारीरिक शोषण का आरोप लगाते हुये कहा कि उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन और 25 हजार रुपये एडवांस देने की बात कह कर एक दलाल द्वारा लाया गया था लेकिन यहां लाकर उन्हें बंधुआ बना दिया गया. मजदूरों ने कहा कि उनकी जीवन नर्क बना दिया गया और उन्हें भरपेट खाना भी नहीं दिया जा रहा था.

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